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आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव ही योग: साध्वी भव्यगुणाश्री

केंटोनमेंट में प्रवचन

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आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव ही योग: साध्वी भव्यगुणाश्री

आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव ही योग: साध्वी भव्यगुणाश्री

बेंगलूरु. मुनिसुव्रत स्वामी जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ, केंटोनमेंट में साध्वी भव्यगुणाश्री ने कहा कि निरंतर अभ्यास और प्रयास से मन के विचारों की धारा अविरल बहने लगती है। योग का अर्थ होता है जोडऩा। आत्मा का परमात्मा के साथ जुड़ाव करना ही योग कहा जाता है। इससे हमें परमात्मा का परिचय मिलता है और परमात्मा से संबंध स्थापित करने का मार्ग प्राप्त होता है। देह के अभिमान के कारण ही सब कुछ होते हुए भी हम कुछ नहीं है। हमसे नैतिक मूल्य दूर हो रहे हैं। गुणों के सागर परमात्मा के साथ संबंध स्थापित करेंगे तो हमें शांति मांगनी नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा आज हम अपने ही अस्तित्व को भूल चुके हैं। हम सब भगवान की ही संतान है।भगवान सुख के दिनों में साथ चलता है और दुख की घड़ी में कांधे पर बैठाकर चलता है।

साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। समाज एवं राष्ट्र निर्माण के प्रयास महिलाओं की भूमिका के बिना अधूरे हैं। मोहनलाल बोहरा ने बताया कि साध्वी की निश्रा में गुरुवार को सुबह 10 बजे सतरभेदी पूजन एवं 11 बजे मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय ध्वजारोहण कार्यक्रम होगा। राजमल सुनील कुमार रिषभ गुलेच्छा परिवार ने दर्शन-वंदन का लाभ लिया।