
राजस्थान पत्रिका बांसवाड़ा संस्करण का 16वां स्थापना दिवस आज : 'सच का पैरोकार, निभाए सामाजिक सरोकार'
बांसवाड़ा/डूंगरपुर. राजस्थान पत्रिका का बांसवाड़ा संस्करण आज अपना 16 वां स्थापना दिवस मना रहा है। इसके साथ एक और खुशी की बात यह है कि अगले दिन हम गणतंत्र दिवस मनाएंगे। आपको पत्रिका के स्थापना दिवस एवं गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं। मां त्रिपुरा सुंदरी की धरा पर बांसवाड़ा संस्करण का प्रकाशन 25 जनवरी 2004 को शुरू हुआ था और 15 साल का सफर तय करने के बाद 16वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। पत्रिका ने लोकतंत्र के सजग प्रहरी के रूप में अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन किया है, सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। पूरे वर्ष विभिन्न विषयों पर लेखनी चली तो उसके सार्थक परिणाम भी सामने आए।
भोपों पर शिकंजा, हुई गिरफ्तारी : - जनजाति क्षेत्र में उपचार के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे भोपों के खिलाफ भी पत्रिका ने मुहिम चलाई। पत्रिका की खबरों पर भोपों के खिलाफ मुकदमें दर्ज हुए एवं उनकी गिरफ्तारी भी हुई। इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर भी पड़ताल कर बगैर डिग्री उपचार करने वालों को चिह्नित किया गया।
पहली बार 15 आरएएस एक मंच पर : - पत्रिका की ओर से बांसवाड़ा के प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं को मार्गदर्शन देने के लिए सेमिनार आयोजित किया। खास बात यह थी कि बांसवाड़ा के इतिहास में पहली बार 15 आरएसएस, एक आईएएस, एक आईएफएस को एक मंच पर लाकर युवाओं को कॅरियर निर्माण के टिप्स दिए गए। तीन घंटे के सेमिनार में बड़ी संख्या में युवाओं एवं अभिभावकों ने भागीदारी निभाई एवं पत्रिका के आयोजन को भी सराहा। पत्रिका ने प्लास्टिक मुक्त अभियान, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, मतदाता जागरूकता सहित विभिन्न विषयों पर काम कर आमजन को जागरूक किया।
लेम्प्स ऋण माफी घोटाले की खोली कलई : - बांसवाड़ा-डूंगरपुर में लेम्प्स के माध्यम से कृषक ऋण माफी के नाम पर हुए घोटाले को सर्वप्रथम राजस्थान पत्रिका ने उजागर किया। जनवरी और फरवरी 2019 में लगातार खबरें प्रकाशित कर पूरे घोटाले की कलई खोली। पत्रिका की खबरों पर राज्य सरकार ने एक्शन लेते हुए पूरे प्रदेश में लेम्प्स की जांच कराई। डूंगरपुर जिले में 150 करोड़ की गड़बडिय़ां उजागर हुई और दर्जन भर लेम्प्स व्यवस्थापकों को हटाया गया। बांसवाड़ा में सख्ती से कार्रवाई की गई।
अभिभावकों को दिलाई राहत : - डूंगरपुर में निजी विद्यालयों की पुस्तकों में कमीशनखोरी को उजागर करते हुए अप्रेल माह में पत्रिका ने समाचार श्रृंखला प्रकाशित की। निजी प्रकाशनों और पुस्तक विक्रेताओं की सांठगांठ को उजागर किया। इसके परिणाम स्वरुप पुस्तक विक्रेता ने शहर के सभी अभिभावकों को 15 प्रतिशत राशि वापस लौटाई।
काली दाल का उजागर किया सच : - स्कूलों में पोषाहार में बांटने के लिए आई उड़द की दाल पर कलर कोटिंग की गई थी। यह दाल खाने योग्य नहीं थी, बावजूद स्कूलों में बच्चों के लिए भेजी जा रही थी। डूंगरपुर में राजस्थान पत्रिका ने इस मामले को पूरी दबंगता से उजागर किया। परिणामस्वरुप सरकार और विभाग ने पूरे प्रदेश से उक्त दाल को वापस मंगवाया।
पाठकों को अभिव्यक्ति का मंच : - पत्रिका ने एक तरफ जहां जनता की आवाज को बुलंद किया, वहीं दूसरी ओर आमजन को भी अभिव्यक्ति का मंच दिया। ‘निशब्द चित्र को दें शब्द’ की टेग लाइन के साथ मानवीय पहलू को समेटी फोटो प्रकाशित कर पाठकों से केप्शन आमंत्रित किए। इसमें सैकड़ों लोगों ने अपने भावों को अभिव्यक्त किया। पत्रिका ने सभी केप्शन पाठकों के नाम सहित प्रकाशित कर उन्हें प्रोत्साहित किया।
हजारों युवा फिर जुड़े रोजगार से : - राज्य सरकार ने प्रदेश के 905 विद्यालयों मं लगे व्यावसायिक प्रशिक्षकों को हटा दिया था। इससे हजारों युवा बेरोजगार हो गए थे, वहीं व्यावसायिक शिक्षा की परिकल्पना भी धूमिल हो रही थी। पत्रिका एक बार फिर आवाम की आवाज बनकर उभरा। लगातार खबरें प्रकाशित की। आखिरकार सरकार को व्यावसायिक शिक्षा को जारी रखते हुए सभी प्रशिक्षकों को वापस विद्यालयों में नियुक्त करना पड़ा।
अल्पसंख्यक मामलात विभाग में छात्रवृत्ति घोटाला, सरकार ने पॉलिसी बदली : - फरवरी माह में वागड़ में अल्पसंख्यक मामलात विभाग की छात्रवृत्ति में करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर किया गया। इसमें बताया कि ऑनलाइन आवेदन सीधे मुख्यालय स्तर पर एप्रुव किए जाने से हजारों अपात्र लोगों ने इसका लाभ ले लिया और पात्र लोग वंचित रह गए। पत्रिका की खबरों के आधार पर सरकार ने पूरे मामले की जांच कराई। साथ ही पॉलिसी में बदलाव करते हुए आवेदनों की जांच को जिला स्तर पर करना तय किया।
अन्न का करें मान : - शादी-ब्याह सहित अन्य आयोजनों में भोजन के अपव्यय को रोकने के लिए डूंगरपुर में पत्रिका ने अन्न का करें मान शीर्षक से समाचार श्रृंखला प्रकाशित की। इसमें डूंगरपुर से लेकर देश और विश्व में जुठन के चलते भोजन के अपव्यय को दर्शाते हुए लोगों को आवश्यकतानुसार थाली में भोजन लेने तथा जुठन नहीं छोडऩे के लिए प्रेरित किया। अभियान से प्रेरित होकर वैवाहिक आयोजन स्थलों के संचालकों ने स्वस्फूर्त जागरूकता संबंधी फ्लेक्स-बैनर लगवाए।
पीडि़तों का बना मददगार : - पत्रिका कई बार पीडि़तों का मददगार भी बना। किडनी की समस्या से पीडि़त एक युवक को नया जीवन देने के लिए पत्रिका ने उसकी व्यथा उजागर की। परिणामस्वरुप युवक के इलाज के लिए परिवार को लाखों रुपए की मदद मिली। इसके अलावा मेहनत मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहे दिव्यांग को कृत्रिम पैर और विभागीय योजनाओं से लाभ मिला। कुष्ठ रोग से पीडि़त एक महिला का दु:खड़ा उजागर करने पर कलक्टर ने स्वयं उसके घर पहुंच कर राहत उपलब्ध कराई।
विद्यालय सुरक्षा कार्यशाला : - सूरत कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकाण्ड के बाद डूंगरपुर के शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर राजस्थान पत्रिका ने जुलाई माह में कार्यशाला आयोजित की। इसमें निजी व सरकारी विद्यालयों के निदेशक-संस्थाप्रधानों ने भाग लिया। कार्यशाला में पुलिस, परिवहन, विद्युत, अग्निशमन आदि विभागों के अधिकारियों ने विद्यालयों में सुरक्षा को लेकर बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। साथ ही आग लगने की स्थिति में सुरक्षा उपकरणों के उपयोग का लाईव डेमो भी दिया गया।
सैकड़ों लोग बने हमराह : - लोगों को सेहत के प्रति सावचेत करने के उद्देश्य से पत्रिका ने हमराह कार्यक्रम किए। इसमें सैकड़ों लोगों ने भागीदारी निभाकर अपनी रूचि के अनुसार खेल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भागीदारी निभाई। हमराह मंच को मतदाता जागरूकता से जोडऩे हुए लोगों अनिवार्य मतदान की शपथ भी दिलाई गई।
डिजिटल प्लेटफार्म : - पत्रिका ने अपने डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए वागड़ की संस्कृति, प्राचीन देवालयों और उभरते हुए कलाकारों को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया। देश-विदेश में बैठे व्यूवर ने उसे सराहा। इसके अलावा साहित्य, मनोरंजन आदि फिल्ड में संघर्षरत नवोदित प्रतिभाओं को भी डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया। शहर सहित जिले भर में हुए बड़े आयोजनों का लोगों को घर बैठे लाइव कवरेज दिखाया।
Published on:
25 Jan 2020 01:40 pm
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