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धर्मकर्म : ‘स्वभाव के विरूद्ध क्रिया अनाचरण है’

हनुमान चालीसा के पदों की व्याख्या की गई।

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धर्मकर्म : 'स्वभाव के विरूद्ध क्रिया अनाचरण है'

धर्मकर्म : 'स्वभाव के विरूद्ध क्रिया अनाचरण है'

तलवाड़ा. लक्ष्मीनारायण मंदिर के परिसर में स्थित श्रीराम सत्संग भवन में व्यास पीठ पर जय मां गंगे धर्म प्रचारक राम कथा मंडल काशी के राघवेंद्र द्विवेदी ने कहा कि मन में बुरी कामना ना हो। रामचरित मानस धर्म, अर्थ व काम और मोक्ष की परिकल्पना है स्वभाव के विरूद्ध क्रिया अनाचरण है, धर्माचरण है समाज में अमीर-गरीब का भेद नहीं रखना। जो सबसे बड़ा धर्म है। आज के समाज और देश का उत्थान तो झोपड़ों में है, हम सभी उनका उद्धार करें। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर पीड़ा वेदना गौ माता की है। लेकिन इससे सुनने वाला कोई नहीं है। वहीं हनुमान चालीसा के पदों की व्याख्या की गई।
कथा एवं सत्संग आज से
परतापुर. भावसार समाज परतापुर द्वारा चिंतामणि गणपति मंदिर भावसार नोहरे में सोमवार से तीन दिवसीय कथा एवं सत्संग का आयोजन किया जा रहा है। महेश भावसार ने बताया कि इसमें रामस्नेही सम्प्रदाय मेड़ता धाम गादीपति रामनिवास शास्त्री दोपहर 3 से 5 बजे तक कथा वाचन करेंगे।

जैन समाज : इधर, तपस्वियों का किया बहुमान

बांसवाड़ा. जैन श्वेताम्बर सोशल गु्रप की ओर से चातुर्मास में तपस्या करने वाले तपस्वियों का रविवार को महावीर स्थानक भवन में बहुमान किया गया। सुव्रता मसा आदि ठाणा की निश्रा में धर्म चक्र, आठ और इससे अधिक उपवास करने वाले 17 तपस्वियों का बहुमान किया गया। दोपहर में श्री गौड़ी पारसनाथ उपाश्रय में आचार्य कुमुदचंद्र सूरी मसा आदि ठाणा तथा साध्वी श्रीनिधि दर्शाना म.सा. की निश्रा में सिद्धितप, 16 उपवास, 8 और 8 से अधिक उपवास के 20 तपस्वियों का बहुमान श्रीफल, मोती के हार, शॉल तथा अभिनंदन पत्र से किया गया। आचार्य ने तपस्या के बहुमान एवं अनुमोदना के महत्व को बताया। कार्यक्रम में तपस्वी, परिवारजन व समाजजन उपस्थित रहे।

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