13 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

#AmritamJalam : जल में नारायण का वास, पुरुषोत्तम मास में जल की सेवा पुण्यदायी- संत रघुवीर दास

संत सान्निध्य में पातेला तालाब पर श्रमदान में सैकड़ों लोग जुटे

less than 1 minute read
Google source verification
banswara

#AmritamJalam : जल में नारायण का वास, पुरुषोत्तम मास में जल की सेवा पुण्यदायी- संत रघुवीर दास

बांसवाड़ा. तलवाड़ा. राजस्थान पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के तहत सोमवार को पातेला तालाब पर श्रमदान गो संत रघुवीरदास महाराज के सान्निध्य में किया गया। इस अवसर पर तालाब के अंदर सफाई को लेकर सैकड़ों लोगों ने श्रमदान किया। पातेला तालाब पर श्रमदान के लिए सुबह सात बजे से ही ग्रामीण पहुंचने लगे। ग्रामीण अपने साथ लाए औजारों के साथ जंगली झाडिय़ां और जलकुंभी हटाने के लिए जुटे। बाद में तालाब से निकाली कांटेदार झाडिय़ों आदि को जलाया गया।

अभियान की सराहना
गो संत ने अमृतं जलम् अभियान की सराहना करते हुए कहा कि जब तक जल रहेगा, प्रकृति रहेगी। इस अमृत को शुद्ध करने का अभियान सराहनीय है। ये सेवा अलग- अलग माध्यम से संचालित रहनी चाहिए, ताकि प्रकृति के मूल तत्व सुरक्षित रहें। इस मौके पर सरपंच रमेशचंद्र डिण्डोर, हैड कांस्टेबल सुरेन्द्रसिंह, कांस्टेबल अनिल, महेन्द्र व्यास, जसवंत रावल, योगेश द्विवेदी, लेम्प्स व्यवस्थापक गजेन्द्र चौबीसा, समाजसेवी प्रकाश भटट, निरंजन त्रिवेदी, रमेश चरपोटा, कचरा भाई सहित महिलाएं व पुरूष उपस्थित थे। संचालन चंद्रशेखर त्रिवेदी ने किया। आभार सचिव रामकरण योगी ने व्यक्त किया। लोगों ने भी स्वप्रेरणा और उत्साह के साथ तालाब पर श्रमदान किया। बच्चे, वयस्क, बुजुर्ग कोई भी श्रमदान करने में पीछे नहीं था। लोगों ने पत्रिका के अभियान की सराहना की और हर संभव सहयोग देने की बात कही।

जल सेवा प्रकृति की सेवा
इस मौके पर गो संत ने कहा कि जल की सफाई रूपी सेवा ही प्रकृति की सेवा है। जल में नारायण का वास है। यह पांच प्रमुख तत्वों में से एक है। जल की शुद्धता नहीं होने से प्राकृतिक आपदा की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में जल की सेवा पुण्यदायी है। श्रमदान करने वाले श्रमिक नहीं, भक्त हैं, जो पुरुषोत्तम मास का व्रत कर रहे हैं। अल्पाहारी होने के बावजूद सफाई का जो बीड़ा उठाया है, वह प्रशंसनीय है।