
बांसवाड़ा. मोटे अनाज से बिस्किट तैयार करतीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। फोटो पत्रिका
Tribal Womens : वागड़ क्षेत्र की आदिवासी महिलाएं अब आत्मनिर्भरता और आजीविका के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रही हैं। वे बैंकों से लिए गए ऋण को भी समय पर चुका रही हैं। मार्च में प्रदेश में जारी रैंकिंग में वागड़ के जिले भी बेहतर स्थिति में रहे। झुंझुनूं पहले स्थान पर रहा, जबकि डूंगरपुर दूसरे और बांसवाड़ा तीसरे स्थान पर रहे।
दरअसल, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से जुड़कर यहां की आदिवासी महिलाएं बैंकों से ऋण लेकर छोटे-छोटे उद्यम शुरू कर रही हैं। वर्षभर में जिले की 70 हजार 704 महिलाओं ने एसएचजी के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ बनने के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत वर्ष 2025-26 में जिले में 5,110 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को बैंकों से जोड़कर ऋण दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। जिले ने लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए 5,892 एसएचजी को बैंकों से जोड़ा। जिले ने निर्धारित लक्ष्य को भी 100 प्रतिशत से अधिक हासिल कर लिया।
वागड़ क्षेत्र की महिलाएं अचार उद्योग, पापड़, कैंडी, मसाले, सेवइयां, हर्बल सोप, हर्बल गुलाल, नमकीन, नीम ऑयल तथा खाद्य तेल जैसे मूंगफली और सरसों तेल के उत्पादन से जुड़ी हैं। इसके अतिरिक्त फेस वॉश, डिटर्जेंट पाउडर, अगरबत्ती, सेनेटरी पैड, सहजन का पाउडर बनाने जैसे उद्यमों में सक्रिय हैं। महिलाएं तीर-कमान, टोकरियां तथा मोटे अनाज के बिस्किट बनाने जैसे पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के कार्यों में भी हाथ आजमा रही हैं।
झुंझुनूं - 0.44
डूंगरपुर - 0.59
बांसवाड़ा - 1.23
चूरू - 1.53
कोटा - 1.61
वर्ष 2025-26 में एसएचजी के माध्यम से 70 हजार 704 महिलाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपए तक का ऋण मिला। मार्च में सर्वाधिक ऋण चुकाने वाले जिलों में भी वागड़ के जिले आगे रहे। बांसवाड़ा का एनपीए 1.23 प्रतिशत के साथ प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा।
राजीविका आजीविका के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रही हैं। हाल ही में लगे मेले में यहां के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। आगे भी प्रयास रहेगा कि अधिकाधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
डॉ. इंद्रजीत यादव, जिला कलक्टर, बांसवाड़ा
Published on:
12 Mar 2026 09:34 am
बड़ी खबरें
View Allबांसवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
