
बांसवाड़ा : निजी अस्पतालों को टक्कर दे रही आनंदपुरी की मॉडल सीएचसी, डॉक्टरों और विशेषज्ञों की खल रही कमी
बांसवाड़ा. ग्रेनाइट का फ्लोर, एईडी टीवी के साथ वेटिंग रूम, परिसर में पेड़-पौधों के साथ बाहर आकर्षक बगीचा, भर्ती करने के लिए तीस बैड की व्यवस्था, संदेश देती दीवारें और सब कुछ चकाचक। यह नजारा है बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का, जो सरकारी अस्पतालों में वाकई मॉडल बनकर निजी को टक्कर देती दिखलाई दे रही है। पांच करोड़ की लागत से बनी इस सीएचसी में ऑपरेशन थियेटर, एक्स-रे सहित तमाम साधन-सुविधाएं भी हैं और आगे विस्तार की तैयारी भी, लेकिन दरकार विशेषज्ञों की है, जिससे इलाके के मरीजों को बड़ी परेशानी पर बांसवाड़ा या पड़ोसी गुजरात नहीं भागना पड़े। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कायाकल्प प्रोग्राम के तहत वर्ष 18-19 में पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर रही इस मॉडल सीएचसी के आगे शेष अस्पताल फीके प्रतीत होते हैं। कई खूबियों और नवाचार के साथ संचालित की जा रही सीएचसी से मरीजों को मदद भी मिल रही है, लेकिन कुछ कमियों के कारण गुंजाइश छूटी हुई है और इस पर सरकार की इनायत की दरकार है। मॉडल सीएचसी में अभी स्थायी डॉक्टर नहीं है। ऐसे में ब्लॉक स्तर पर जहां भी दो-दो चिकित्सक लगे हैं, उनसे एक-एक जुटाते हुए तीन चिकित्सक लगाए गए हैं। इनमें शामिल डॉ. विनोदकुमार खांट प्रभारी हैं, जबकि उनके साथ डॉ. कुंदन चलाना और डॉ. धर्मेंद्र डिंडोर जुटे हुए हैं। यहां 11 जीएनएम, दो-दो लैब टेक्निशियन और लैब सहायक और पांच सफाईकर्मियों सहित 22 का स्टाफ है, जो सीएचसी को मेंटेन रखते हुए सेवाएं दे रहा हैं।
सुविधाओं के साथ समस्याएं भी मौजूद : - अस्पताल में यूनिक लेबर रूम, जो पूरी तरह हाइजिनिक और इन्फेक्शन फ्री। एक समय में दो प्रसव कराने की व्यवस्था। प्रयोगशाला। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से संबद्धता के साथ अल्फावेटिक रूप से सुव्यवस्थित दवा वितरण केंद्र और स्टोर। परिसर में वाटर कूलर, वेटिंग रूम के अलावा जांच के लिए नई एक्स-रे मशीन की भी व्यवस्था। मौजूदा मानव संसाधन से 24 घंटे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा। मोर्चरी और पोस्टमार्टम की व्यवस्था, ताकि शव बांसवाड़ा भेजने नहीं पड़े। लेकिन यहां पर अधिकारियों के पद, लेकिन एक पर भी पोस्टिंग नहीं है। सृजन, पीडियाट्रिक, गायनिक, एनेस्थे्रसिया सहित पांच विशेषज्ञों की जगह, लेकिन कोई नियुक्ति नहीं है। डीडीसी संचालन के लिए फार्मासिस्ट नहीं, स्टाफ सदस्य ही संभाल रहे जिम्मा। एक्स-रे मशीन नई है, लेकिन टेक्निशियन का पद रिक्त होने से इस्तेमाल मुमकिन नहीं। सामान्य प्रसव तो हो रहे, लेकिन विशेषज्ञों के अभाव में जटिलता की स्थिति पर सिजेरियन संभव नहीं होने से मरीज को बांसवाड़ा भेजने का ही विकल्प। अस्थि रोग विशेषज्ञ भी नहीं, जिससे हादसे में चोटिल आने पर बांसवाड़ा भेजने की मजबूरी।
विशेषज्ञ मिलें तो और बेहतरी के करेंगे प्रयास : - आनंदपुरी बीसीएमएचओ डॉ. राहुल डिंडोर का कहना है कि प्रदेश में दूसरा स्थान मिलने के बाद मॉडल सीएचसी को मेंटेन रखने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। अब तो सीएचसी को 50 बैड की करने की मंजूरी भी मिल रही है। कमी केवल विशेषज्ञों की है। एमओ और विशेषज्ञ लगाने पर यहां सेवाएं और बेहतर दी जा सकती हैं। इसके लिए उच्चाधिकारी भी प्रयासरत हैं। इधर, बागीदौरा विधायक महेंद्रजीतसिंह मालवीया ने कहा कि आनंदपुरी की मॉडल सीएचसी में चिकित्सक स्थायी नहीं होने की जानकारी है। इस बारे में बात कर व्यवस्था कराएंगे।
Published on:
26 Dec 2019 04:36 pm
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