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बांसवाड़ा: ये सब्जी वाला गांव बड़लिया… 100 क्विंटल से अधिक सब्जी रोज पहुंचा रहा मण्डी

Sabji Wala Ganv In Banswara : अधिकांश परिवार सब्जी उत्पादन से जुड़े, तकनीकी खेती मिले तो बने बात, युवा से लेकर बुजुर्ग तक खेतों में करते हैं मेहनत

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वरुण भट्ट/संजय पटेल. बांसवाड़ा. जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा जिले में एक गांव ऐसा भी है, जो सब्जीवाले गांव के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर बडलिया गांव में 200- 300 परिवारों में अधिकांश सब्जी उत्पादन के कार्य से जुड़े हुए है। युवा से लेकर बुजुर्ग एवं महिलाएं खेतों में सब्जी उत्पादन से कार्य में जुटते है। यहीं कारण है कि बांसवाड़ा की सब्जी मण्डी भी इस गांव पर निर्भर है। साथ ही पूरे जिले में सब्जी के मामले में यह गांव विशेष पहचान कायम किए हुए है। गांव में उपजाऊ जमीन, पानी की उपलब्धता जैसी अनुकूल स्थितियां किसानों के लिए मददगार है, लेकिन किसानों का इस बात का मलाल है कि लागत मूल्य नहीं मिल पा रहा है। मुख्य रूप से गांव में अधिकांश परिवार गोभी, रतालु, टमाटर, बैंगन, प्याज, लोकी सहित अन्य सब्जियों का वर्षभर में बड़े पैमाने पर उत्पादन करते है। जिसके बाद जिला मुख्यालय पर मण्डी तक इसे पहुंचाया जाता है। किसानों को उन्नत कृषि तकनीकी से प्रशिक्षण जैसी सुविधा की भी दरकार है।

ये कहते है काश्तकार
– किसान अशोक भोई बताते है कि पूरा परिवार खेती-बाड़ी से जुड़ा हुआ है। सात से दस बीघा जमीन है, जिसमें सब्जियों का समयवार उत्पादन किया जाता है। वार्षिक आठ से दस लाख रुपए की आय हो जाती है। गांव में भोई समाज के 70 मकान पूरी तरह से सब्जी का उत्पादन करते है।
– युवा महेंद्र पटेल बताते है कि गांव में करीब 200 से 300 परिवार है, जिनमें अधिकांश सब्जी उत्पादन से जुड़े हुए है। प्रतिदिन सब्जी करीब 15 से अधिक रिक्शा के माध्यम से नजदीकी सब्जी मण्डी तक पहुंचती है। उपलब्ध जमीन के आय वृद्धि के मामले में उपयोग को लेकर ग्रामीण नजीर पेश कर रहे है। मण्डी में किसानों से लिए जाने वाले कमीशन की स्थितियों पर अंकुश पर भी प्रशासन को काम करना चाहिए।
– वालेंग पटेल बताते है कि सब्जी उत्पादन में गांव जिले में पहले नंबर पर है। पुरानी पद्धति से ही गांव में सब्जी उत्पादन को लेकर किसान जुड़े हुए है। नए युग के साथ विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की दिशा में पहल करनी होगी। साथ ही खाद, बीज जैसी सुविधा को लेकर किसानों को प्रोत्साहित करना होगा।

फैक्ट फाइल
– गांव में कुल परिवार 200 से 300
– प्रतिदिन करीब 100 क्विंटल से अधिक सब्जी मण्डी तक पहुंच
– एक लाख रुपए की औसत दैनिक आय
– मौजूदा समय में गोभी की बंपर पैदावार होती है। 20 रुपए किलो औसत भाव होने से प्रतिदिन 2 लाख से ज्यादा आय।