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बांसवाड़ा : शिक्षा देने से पहले स्वयं आदर्श बनें गुरु

स्कूली विद्यार्थियों को दी सीख
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बांसवाड़ा : शिक्षा देने से पहले स्वयं आदर्श बनें गुरु

बांसवाड़ा : शिक्षा देने से पहले स्वयं आदर्श बनें गुरु

बांसवाड़ा. बाहुबली कॉलोनी में आर्यिका अर्हमश्री माताजी ने गुरुवार को स्कूली विद्यार्थियों को सीख दी और शिक्षक से भी शिक्षा देने से पहले स्वयं आदर्श बनने का आह्वान किया।
मांगलिक भवन में आर्यिका ने विद्यार्थियों कहा कि लक्ष्य से कार्यसिद्धि नहीं होगी। इसके लिए अपने शिक्षक को आदर्श मानना होगा। जब विद्यार्थी शिक्षक को आदर्श माने तो शिक्षक को भी आदर्श की तरह कार्य करना होगा। शिक्षक बच्चों को अच्छे संस्कार दें। अनुशासन सिखाएं। तामसी वृत्ति से दूर रखें। ऐसा भोजन करें, जिससे भाव व विचार अच्छे हों।
विद्यार्थी अपने जीवन को संस्कारित करेंगे, तभी ऊंचाइयों को प्राप्त कर जाएंगे। प्रवक्ता महेंद्र कवालिया ने बताया कि राउमावि नूतन के प्राचार्य राजीव जुआ, शिक्षक आदि उपस्थित रहे। श्री समाज ने स्वागत किया।
आत्मा का कल्याण करो
मोहन कॉलोनी आदिनाथ जिनालय में आचार्य सुंदरसागर महाराज ने कहा कि जिनशासन में भोगों की नहीं, योगों की प्रधानता है। उन्होंने रामकथा प्रस्तुत कर कहा कि संसार में कई संप्रदाय है, जो बैकुंठ को ही प्राप्त करना चाहते हैं। बैकुंठ में जाने के बाद पुन: संसार में जन्म-मरण करना पड़ेगा। उन्होंने अपनी आत्मा का कल्याण करने का आह्वान कर कहा कि यह मनुष्य पर्याय का अवसर चला गया तो दोबारा अवसर नहीं मिलेगा। जहां सच्चा सुख है, उसी दिशा में पुरुषार्थ करो। मयंक जैन ने बताया कि आचार्य श्रीसंघ सान्निध्य में जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा समाजजनों ने की। रात्रि में गुरु भक्ति कार्यक्रम में समाज अध्यक्ष पवन नश्नावत, अजबलाल वोरा, डा. दिनेश नश्नावत आदि उपस्थित रहे।

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