वरुण भट्ट बांसवाड़ा
जिले में जीवनदायिनी माही नदी पर बने बांध के पार्श्व भाग में टापू प्राकृतिक सौन्दर्य में अभिवृदि्ध करने के साथ ही पर्यटकों के भी आकर्षण का केंद्र हैं। दूसरी ओर इसी पार्श्व भाग में गांव चाचाकोटा बसा है। मौसम में बदलाव के साथ ही चाचाकोटा के टापुओं का रूप भी बदलने लगा है। बरसात के दिनों में पानी के बीच पूरी तरह से हरित चादर से ढके रहते है, लेकिन इन दिनों टापुओं का नजारा मिश्रित नजर आ रहा है।
विकास के दावे हवा, फिर पर्यटक कैसे पहुंचे यहां
माही बेक वाटर क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने को लेकर पिछले लंबे समय से सरकारें एवं प्रशासन की ओर से दांवे किए जा रहे है, लेकिन अब तक विकास के मामले में ज्यादा कुछ नजर नहीं आया है। हर वर्ष बरसात के मौसम में हरियाली की चादर से आकर्षक इस क्षेत्र तक पर्यटक भी पहुंचते हैं, लेकिन यहां सुविधाओं एवं सुरक्षा के इंतजामात तक नहीं है। प्रशासन भी विकास के मामले में महज आश्वासन देकर ही इतिश्री करने में लगा हुआ हैं, जिससे प्राकृतिक सौंदर्य के इस क्षेत्र तक राजस्थान के विभिन्न जिलों एवं अन्य राज्यों के पर्यटकों की पहुंच सुनिश्चित नहीं हो पा रही हैं। इधर, विगत बजट घोषणा में वागड़ पर्यटन सर्किट में भी शामिल किया हैं, ऐसे में एक बार फिर से विकास की आस जगी हैं।
फैक्ट फाइल
100 टापुओं के शहर से ख्यात है बांसवाड़ा
15 किलोमीटर दूरी पर है बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से चाचाकोटा
10 करोड़ की बजट घोषणा पूर्व में हुई थी बेक वाटर क्षेत्र के टापुओं के विकास के लिए
2 हजार फीट की ऊंचाई से ड्रोन कैमरे से कैद किया नजारा