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माही मांगे पानी : बांसवाड़ा में मानसून की बेरूखी के कारण बिजली उत्पादन को लगा ग्रहण

Electricity generation in Banswara, Mahi Dam Banswara : पिछली बार रिकार्ड तोड़ा, इस बार मानसून ने मुंह मोड़ा, बांसवाड़ा में बिजली उत्पादन भी नहीं

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माही मांगे पानी : बांसवाड़ा में मानसून की बेरूखी के कारण बिजली उत्पादन को लगा ग्रहण

माही मांगे पानी : बांसवाड़ा में मानसून की बेरूखी के कारण बिजली उत्पादन को लगा ग्रहण

दीनदयाल शर्मा/बांसवाड़ा. जिले में इस बार रूठे मानसून से माही बांध आधा रीता होने हैं। ऐसे बांसवाड़ा के पनबिजली घरों को मानों ग्रहण लग गया है। पिछली बार सात साल के रेकॉर्ड बिजली उत्पादन के बाद अब तक बारिश की लचर स्थिति से पानी की आवक नाममात्र की है। इससे जब बांध में ही पानी कम है तो बिजली बनाने के लिए वह कहां से मिले। ऐसे में उत्पादन निगम में भी मायूसी है। अब सितम्बर दूसरे पखवाड़े तक पड़ोसी मध्यप्रदेश में अपेक्षित बरसात की आस है। ऐसा नहीं हुआ, तो इस साल बिजली उत्पादन बीते 20 साल में रेकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचने की आशंका है। दरअसल, उदयपुर संभाग के सबसे बड़े माही बांध का भराव मध्यप्रदेश में अच्छी बरसात पर निर्भर है। वहां से माही और एराव नदियों से बहकर आने वाले पानी से ही माही का जलस्तर बढ़ता है। इस साल मध्यप्रदेश में खंडवृष्टि के बाद बरसात का सिलसिला शिथिल रहा है। इससे नाममात्र का पानी आने से माही बांध में आधा खाली है। मौजूदा स्थिति यह है कि माही बांध का लेवन 271.35 मीटर ही है। इससे जब आवक ही नहीं, तो बांसवाड़ा के पनबिजलीघर चालू होने का सवाल ही नहीं है। गौरतलब है कि पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में यहां 21.98 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन हुआ, जो 2013-14 के 22.70 करोड़ यूनिट के बाद अधिकतम रहा है।

बांसवाड़ा से रूठा मानसून, आधा अगस्त बीतने के बाद भी खाली माही बांध, छोटे जलाशय भी तरसे

18 साल पहले हुआ था नगण्य उत्पादन
बांसवाड़ा में माही के पानी पर निर्भर पावर जनरेशन का बीते 20 साल का इतिहास टटोलें, तो 2020 जैसी स्थिति वर्ष 2002-03 में हुई थी, जबकि पानी की नगण्य आवक के कारण पूरे साल में मात्र 2.20 लाख यूनिट बिजली उत्पादन हो पाया। उसके बाद अब तक सात दफा ही ऐसा हुआ, जब दोनों इकाइयां जमकर चलने से सालाना 20 लाख यूनिट से ज्यादा बिजली बनी। पिछले साल माही लबालब होते ही अगस्त में रतलाम रोड से सटे और लीलवानी के पावर हाउस में बिजली उत्पादन का सिलसिला जोरों पर रहा, वहीं स्वाधीनता दिवस से एक दिन पहले तो बांध के सभी 16 गेट खोलने पड़े थे। इस साल वह नजारा तो दूर की बात, पनबिजलीघर की एक भी इकाई चालू करने जितनी आवक तक नहीं है।

सालाना बिजली उत्पादन एक नजर में
वर्ष उत्पादन यूनिट (करोड़)
2001-02 - 6.85
2002-03 - 2.20
2003-04 - 19.16
2004-05 - 26.49
2005-06 - 20.49
2007-08 - 28.32
2008-09 - 11.34
2009-10 - 8.51
2010-11 - 6.62
2011-12 - 18.04
2012-13 - 20.41
2013-14 - 22.70
2014-15 - 15.96
2016-17 - 20.96
2017-18 - 18.01
2018-19 - 11.70
2019-20 - 21.98

इनका कहना है...
इस बार माही बांध में पानी की आवक काफी कम है। मई-जून में पनबिजलीघरों के मेंटेनेंस का काम युद्धस्तर पर कर जुलाई तक हमारी तैयारी पूरी रही, तब से इंतजार ही रहा है। सितंबर प्रथम सप्ताह तक उम्मीद है, वरना इस बार भी बिजली उत्पादन नगण्य रहने के आसार हैं।
दिलीप गेहानी, अधीक्षण अभियंता, विद्युत उत्पादन निगम

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