
नवजातों की मौत के मामले में यूनीसेफ के राज्य प्रमुख ने एमजी अस्पताल व एसएनसीयू का निरीक्षण किया
बांसवाड़ा. महात्मा गांधी चिकित्सालय में अगस्त माह में 53 दिनों में 81 से अधिक नवजात बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार और सुविधाओं के विस्तार के मकसद से यूनीसेफ के राज्य प्रमुख अनिल अग्रवाल गुरुवार को यहां महात्मा गांधी चिकित्सालय और परतापुर स्थित एसएनसीयू ( स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट) के निरीक्षण के लिए पहुंचे। शिशुओं की मृत्यु को कम करने के लिए एसएनसीयू की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी के मद्देनजर एसएनसीयू को और अधिक सुविधायुक्त एवं संक्रमण मुक्त करने की कवायद नए सिरे से शुरू की जा रही है।
औचक निरीक्षण के बारे में राज्य प्रमुख अग्रवाल ने ब्योरा देने में असमर्थता जताई और सिर्फ यही कहा कि पड़ताल की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचाएंगे जिसके आधार पर और सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है। नया कुछ करने से पहले जो है क्या कमियां हैं उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस बारे में सीएमएचओ और महात्मा गांधी चिकित्सालय के पीएमओ को भी कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने कार्यवाहक पीएमओ अनिल भाटी, महिला रोग विशेषज्ञ एमएल जैन, हैल्थ मैनेजर हेमलता जैन से आवश्यक जानकारियां जरूर प्राप्त की।
गौरतलब है कि बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में कुछ माह में करीब 81 नवजातों की मौत का मामला सामने आया था। जो देशभर में सुर्खियों में था। इस निरीक्षण और इसके आधार पर कमियां दूर करने की कवायद को मौतों को लेकर चिकित्सा विभाग व सरकार को फजीहत से उबारने की कोशिशों का एक हिस्सा माना जा रहा है। प्रदेश में वैसे तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के पास शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को कम करने की जिम्मेदारी है, लेकिन केन्द्र सरकार ने इसमें सहयोग के लिए यूनीसेफ का भी सहारा लिया है जो आर्थिक एवं अन्य सहयोग के माध्यम से योजनाएं संचालित करता है।
Published on:
28 Dec 2017 10:36 pm
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