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बांसवाड़ा : प्रशासनिक व राजनीतिक हस्तक्षेप के भंवर में शिक्षा अधिकारी !

Education Department Rajasthan, Banswara News : शिक्षा विभाग - प्रशासनिक व राजनैतिक हस्तक्षेप पर अंकुश की उठी मांग

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बांसवाड़ा : प्रशासनिक व राजनीतिक हस्तक्षेप के भंवर में शिक्षा अधिकारी !

बांसवाड़ा : प्रशासनिक व राजनीतिक हस्तक्षेप के भंवर में शिक्षा अधिकारी !

बांसवाड़ा. प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा विभाग के तहत जिला शिक्षा अधिकारियों के अधिकारों पर कैंची की स्थिति नजर आ रही हैं। स्थिति यह है कि स्वतंत्र रूप से अफसर तबादले, स्थायीकरण, पदस्थापन सहित अन्य कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने इन हालातों को गलब बताते हुए डीईओ को स्थानातरण व अन्य सभी कार्यो को बिना किसी हस्तक्षेप के अपने स्तर सम्पादित करने के पूर्ण अधिकार देने की मांग उठाई हैं।

ये है स्थिति, महज रस्म अदायगी

- शिक्षा विभाग में पीईईओ व सीबीईओ की व्यवस्था कर शिक्षा में पंचायती राज व्यवस्था अप्रत्यक्ष रूप से समाप्त कर दी, लेकिन नियुक्ति, पदस्थापन, स्थाईकरण करने जैसे कार्यो में प्रारम्भिक शिक्षा को पंचायत राज के कार्मिक मानते हुए जिला परिषद के अनुमोदन से कराने व आदेश जारी करने की व्यवस्था है।
- डीईओ को किसी शिक्षक की अपने स्तर पर प्रतिनियुक्ति या शिक्षण व्यवस्था में ड्यूटी लगाने का अधिकार भी नही रहा। थर्ड ग्रेड शिक्षक की प्रतिनियुक्ति भी ऑनलाइन शाला दर्पण पर निदेशालय की स्वीकृति लेने के बाद ही करने के निर्देश है।

-थर्ड ग्रेड शिक्षकों के स्थानातरण भी राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद ही होते आए हैं।
- शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही करने के अधिकार पहले जिला शिक्षा अधिकारी के पास थे। अब सीसीए नियम के तहत जिला कलेक्टर को भी अधिकार प्रदान किए हैं।

- बीएलओ व जनगणना कार्य मे ड्यूटी लगाने के अधिकार सीधे उपखंड अधिकारियों को दिए हैं।

संगठन ने भेजा सरकार को पत्र
शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक को स्वतंत्र अधिकार देने की मांग की हैं। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष सम्पतसिंह, संगठन मंत्री प्रहलाद शर्मा व प्रदेश महामंत्री अरविन्द व्यास ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारियों के मूल अधिकारों में राजनैतिक व प्रशासनिक हस्तपक्षेप बहुत अधिक बढ़ जाने से अधिकारी के काम महज डाकिए के समान ही रह जाना प्रतीत हो रहा हैं। अधिकारी के अधिकारों पर इस कदर कैची चलाना पद की गरिमा के उलट हैं। ऐसे में जल्द स्वतंत्र अधिकार दिए जाए।

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