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सरकार की बगैर अनुमति के करार, नगर परिषद को करोड़ों की राजस्व हानि !

- निजी फर्म को विज्ञापन डिस्प्ले की अनुमति का मामलाबांसवाड़ा. नगर परिषद की ओर से शहर के विभिन्न स्थानों पर यात्री प्रतीक्षालय बनाकर उस पर विज्ञापन डिस्प्ले करने के मामले में प्रतिपक्ष के उप नेता महावीर बोहरा ने आयुक्त, सभापति एवं राज्य सरकार के जरिये जिला कलक्टर को विधिक नोटिस भेजा है। इसमें नगर परिषद पर राज्य सरकार की अनुमति लिए बिना ही निजी फर्म से करार कर अनुचित लाभ पहुंचाने और परिषद को करोड़ों रुपए की राजस्व हानि का आरोप लगाया है।

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सरकार की बगैर अनुमति के करार, नगर परिषद को करोड़ों की राजस्व हानि !

सरकार की बगैर अनुमति के करार, नगर परिषद को करोड़ों की राजस्व हानि !

नोटिस में बोहरा के अनुसार नगर परिषद के पिछले बोर्ड के कार्यकाल में 15 फरवरी 2017 को जमना पब्लिसिटी के आशुतोष मेहता ने परिषद में प्रार्थना पत्र दिया। इसमें आमजन व यात्रियों की सुविधा के लिए यात्री प्रतीक्षालयों के निर्माण की स्वीकृति चाही। फर्म ने 20 वर्ष तक यात्री प्रतीक्षालय पर विज्ञापन लगाने का अपना अधिकार मांगा था और प्रति प्रतीक्षालय सालाना दो हजार रुपए किराया परिषद को अदा करने की बात कही। इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 34 प्रतीक्षालय बनाने की सूची भी दी गई।फर्म पंजीकृत नहीं

फर्म की ओर से जिस तिथि को प्रार्थना पत्र दिया गया, तब तक वह पंजीकृत संस्था नहीं थी। फर्म ने 18 अप्रेल 2017 को अपना पंजीयन कराया। उन्होंने बताया कि 12 अप्रेल को परिषद की अनुज्ञा समिति की बैठक के बाद विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई। इसके बाद नगर परिषद के चुनाव की घोषणा हुई। आचार संहिता के कारण किसी प्रकार के कार्य निष्पादित नहीं हुए। आरोप है कि वर्तमान बोर्ड के सभापति जैनेन्द्र त्रिवेदी ने कार्यभार संभालने के बाद फर्म के प्रस्ताव पर गौर किया और स्वीकृति जारी की। इसके बाद एक दिसंबर 2018 को आयुक्त ने फर्म से पांच सौ रुपए के स्टाम्प पर 30 प्रतीक्षालय बनाने का अनुबंध किया, जो अपंजीकृत है। इसके बाद भी प्रतीक्षालय नहीं बनाए। निकाय चुनाव होने के बाद फरवरी 2020 में यात्री प्रतीक्षालय बनने शुरू हुए और मार्च में तैयार होेने के बाद विज्ञापन डिस्प्ले आरंभ हुआ।परिषद को हानि, फर्म की पौबारह

फर्म को स्वीकृति से परिषद को वार्षिक 60 हजार की आय आरंभ हुई, वहीं आरोप है कि फर्म की ओर से सात से आठ हजार रुपए प्रति विज्ञापन के लिए जा रहे हैं, जबकि परिषद को सालाना दो हजार रुपए ही मिल रहे हैं। आयुक्त और सभापति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए फर्म के साथ 20 वर्ष का करार कर दिया, जबकि इसके लिए राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य है। नोटिस में कहा है कि इस करार के कारण परिषद को करोड़ों रुपए का नुकसान होगा।एसीबी को भी परिवाद

बोहरा की ओर से पूरे प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को भी शिकायत दी गई। इस पर 17 फरवरी 2022 को एसीबी महानिदेशक की ओर से नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को लिखा गया कि परिवाद को विभागीय नियमानुसार कार्यवाही के लिए भेजा जा रहा है। जांच के बाद यदि मामला भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत पाया जाए तो इसके लिए पूर्वानुमोदन उपलब्ध कराएं। नोटिस में फर्म से अनुचित लाभ प्राप्त करने का आरोप लगाते हुए किए करार को नियमों के विपरीत बताया। साथ ही कहा है कि मामले में सक्षम न्यायालय में वाद दायर किया जा रहा है, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया की जिम्मेदारी आयुक्त एवं सभापति की रहेगी।इनका कहना है

प्रतिपक्ष उप नेता महावीर बोहरा को धन्यवाद देता हूं, जो अपने भाजपा के बोर्ड की कारगुजारियां उजागर कर रहे हैं। अनुबंध दिसंबर 2018 में हुआ, जबकि वर्तमान बोर्ड के लिए चुनाव इसके एक साल बाद 2019 में हुए। ऐसे में वर्तमान बोर्ड पर लगाए आरोप तथ्य से परे और निराधार हैं।जैनेन्द्र त्रिवेदी,

सभापति, नगर परिषद, बांसवाड़ा।


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