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बांसवाड़ा

क्या “वागड़ प्रयाग” नहीं रहेगा “बेणेश्वर धाम” ?

बांसवाड़ा. प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 17 मार्च को राज्य विधानसभा में तीन नए संभाग और 19 नए जिले बनाने की घोषणा की। इसमें उदयपुर जिले के सबसे बड़े कस्बे सलूम्बर को जिला बनाया गया है। इसके साथ ही अब इस प्रश्न पर चर्चा होने लगी है कि क्या लाखों आदिवासियों का श्रद्धा धाम बेणेश्वर धाम अब वागड़ प्रयाग नहीं रहेगा?

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बांसवाड़ा. प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 17 मार्च को राज्य विधानसभा में तीन नए संभाग और 19 नए जिले बनाने की घोषणा की। इसमें उदयपुर जिले के सबसे बड़े कस्बे सलूम्बर को जिला बनाया गया है। इसके साथ ही अब इस प्रश्न पर चर्चा होने लगी है कि क्या लाखों आदिवासियों का श्रद्धा धाम बेणेश्वर धाम अब वागड़ प्रयाग नहीं रहेगा?
बेणेश्वर धाम बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों को विभाजित करता है। माही, सोम व जाखम नदियों के जलसंगम तीर्थ बेणेश्वर धाम को वागड़ के प्रयाग की उपमा भी मिली हुई है। बांसवाड़ा और डूंगरपुर दोनों जिले आदिवासी बहुल हैं और दोनों जिलों को समेकित रूप से वागड़ कहा जाता है। मुख्यमंत्री की घोषणा में बांसवाड़ा को संभाग मुख्यालय की सौगात मिली है, किंतु जिले की भौगोलिक सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं सलूम्बर को जिला बनाने से इसमें आसपुर, साबला, बेणेश्वर आदि के सम्मिलित होने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। हालांकि इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से नए घोषित जिलों की राजस्व सीमाओं का निर्धारण होना शेष हैं, किंतु डूंगरपुर से आसपुर क्षेत्र के सलूम्बर में सम्मिलित होने की संभावनाएं व चर्चाएं यह प्रश्न खड़ा कर रही हैं कि क्या बेणेश्वर धाम अब वागड़ से कट जाएगा ? क्या अब बेणेश्वर धाम वागड़ प्रयाग नहीं रहेगा ? क्या सलूम्बर में बेणेश्वर सम्मिलित होने पर ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्य आने वाले समय में विलपित करने होंगे?
यह संदेश हो रहा वायरल
इधर, बांसवाड़ा के संभाग मुख्यालय बनने पर सोशल मीडिया पर यह संदेश भी वायरल हो रहा है कि बांसवाड़ा एकमात्र ऐसा संभागीय मुख्यालय बन गया है, जिसके अधीन आने वाले जिलों में सांसद, विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच आरक्षित श्रेणी के ही प्रतिनिधि होंगे।