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श्रद्धालुओं में उत्साह, डांडियों की खनक पर ​थिरके कदम

बांसवाड़ा. पर्युषण पर्व के समापन के बाद सोमवार को शोभायात्रा व रथ के भंडार के रथोत्सव का सोउल्लास समापन हो गया। इससे पहले जैन समाजजनों ने गांधी मूर्ति सहित कस्टम चौराहे पर घंटों तक डांडिया खेला।

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बांसवाड़ा. पर्युषण पर्व के समापन के बाद सोमवार को शोभायात्रा व रथ के भंडार के रथोत्सव का सोउल्लास समापन हो गया। इससे पहले जैन समाजजनों ने गांधी मूर्ति सहित कस्टम चौराहे पर घंटों तक डांडिया खेला।
रविवार को आदिनाथ मंदिर से निकाला रथ रात्रि में गांधी मूर्ति धर्मशाला पर रहा। सोमवार दोपहर को गांधी मूर्ति पर वाद्ययंत्रों की धुन पर जैन समाज के युवक-युवती और महिला-पुरुषों ने डांडिया खेला। एक लय में कदमताल के साथ डांडिया खेलने वालों का उत्साह देखते ही बना। अपराह्न बाद गांधी मूर्ति से रथ की शोभायात्रा आरंभ हुई। इसमें श्रद्धालु श्रीजी को विराजित कर गंधकुटी कांधे पर लिए चल रहे थे। शोभायात्रा पुराना बस स्टैँड होते हुए कस्टम चौराहा पहंची, जहां पुन: लोगों ने डांडिया खेला। इसके बाद रथ परम्परागत मार्ग से होता हुआ आदिनाथ मंदिर पहुंचा, जहां उसे भंडार किया गया। श्रीजी के जयकारों के साथ ही रथोत्सव का समापन हुआ। इससे पहले रथ यात्रा में कस्टम चौराहे पर पुलक मंच के सदस्यों ने समान वेशभूषा में डांडिया खेला। रथ के पहले दिन भगवान की आरती का सौभाग्य महेंद्र कावलिया परिवार को प्राप्त हुआ। शैलेन्द्र दोसी ने रथयात्रा की फूलमाला की बोली ली।

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