बांसवाड़ा/गढ़ी. प्रतिबंध और पुलिस-खान विभाग की हाल ही हुई कार्रवाइयों के बावजूद बांसवाड़ा जिले के गढ़ी क्षेत्र में नाजायज तरीके से बजरी खनन और निकासी का सिलसिला फिर चल पड़ा है। इस क्षेत्र से पूरे जिले में बजरी की सप्लाई धड़ल्ले हो रही है। चाप नदी व माही नदी के संगम स्थल चोपासाग में बजरी माफिया बाकायदा नदी पेटे के हिस्से बांटकर रातोंरात बजरी निकासी कर वारे-न्यारे कर रहे हैं।
यह हकीकत पत्रिका की पड़ताल से सामने आई है। दो दिन तक रात में खतरे के बावजूद क्षेत्र का मुआयना करने पर यहां बजरी माफियाओं से जुड़े लोग दिन-रात जुटे दिखलाई दिए। रात के समय तो आस-पास के गांवों की 15-20 जेसीबी खनन और बजरी उठाव में लगाई हुई मिली। माही नदी के उस पार वगेरी के सटे भीलूड़ी गांव में शनिवार देर रात पत्रिका टीम ने टोह ली, तो यहां नदी तट पर स्थित श्मशान घाट पर चोपासाग की तरफ 2 किमी क्षेत्र में करीब 15 जेसीबी मशीनें व 50 ट्रैक्टर से खनन और बजरी निकासी का कार्य जोरों पर चलता पाया। यहां गाडिय़ों की रोशनी इतनी थी कि पूरा क्षेत्र जगमगा रहा था। ड्रोन से फोटो लेने के प्रयास पर इंडिकेटर लाइट देखते ही माफियाओं को संदेह हो गया और जेसीबी, ट्रैक्टरों की लाइटें बंद करा दी गईं। बावजूद इसके कुछ फोटो ड्रोन कैमरे में कैद करने में सफलता मिली। पूछताछ से पता चला कि यहां करीब 2 किमी क्षेत्र में बजरी माफियाओं ने नदी में अपने-अपने क्षेत्र बांट रखे हैं। वे सब अपने क्षेत्र में जेसीबी मशीन लगाकर बजरी खनन करते हैं।