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बांसवाड़ा

VIDEO: यहां पहाड़ों के बीच पहाड़ सी जिंदगी, अभावों की डगर पर लगती है दौड़

बांसवाड़ा जिले के छोटी सरवन क्षेत्र का वाक गांव, समस्याएं जान हो जाएंगे अवाक

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जुगल भट्ट बांसवाड़ा

पंचायत समिति छोटी सरवन की ग्राम पंचायत बारी के वाक गांव के ग्रामीण पहाड़ों के बीच पहाड़ सी जिन्दगी बसर कर रहे है। यहां के लोगों पर प्रकृति मेहरबान है, लेकिन प्रशासन व सरकार की नजरें इनायत नहीं है। यहीं कारण है कि आजादी के इतने वर्ष बीतने के बावजूद ग्रामीण सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर हर दिन संघर्ष कर रहे है। बिजली के अभाव में रात के अंधेरे में जंगली जानवरों का डर सताता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ ही बिजली आधारित कामकाज नहीं हो पाते है। पानी के लिए भी कोई ठोस इंतजामात नहीं है। सड़क पर सफर भी जोखिमभरा है।

एलएनटी ने पाइप लाइन डाली, पानी का इंतजार
वार्डपंच पींटू ने बताया कि वाक गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां पर बिजली की समस्या के साथ-साथ पानी की काफी समस्या है। कुछ माह पूर्व बारी सरपंच की पहल से एलएनटी कम्पनी वालों ने पाइप लाइन तो बिछा दिया, लेकिन पहाडी एरिया होने के बाद भी पाइप लाइन ज्यादा चौडी डालने के कारण अब तक तक पानी नही पहुंचा। यहां की महिलाएं करीब एक से दो किमी दूर माही माता डेम के किनारे पानी लेने के लिए जाते है। जहां पर पहाडी से नीचे उतर कर पानी लेने जाना पडता है। राजु डिण्डोर ने बताया कि गांव में आंगनवाडी केन्द्र जर्जर हाेने पर उसे गिरा तो दिया, लेकिन नया नहीं बनाया। गांव में एक मात्र प्राथमिक विद्यालय है। छगन डिण्डोर ने बताया कि बारी से वाक की दूरी करीब 2 से 3 किलोमीटर है। ये सड़क पूरी तरह जर्जर है। जिससे बारिश के दिनों में कीचड से आवाजाही पूरी तरह से प्रभावित होती है।

स्वीकृति के बाद भी पोल नही लगाए
ग्राम वाक में स्थित वनभूमि में विद्युत लाइनें बिछाने के लिए कुल 0:15290 हैक्टेयर भूमि का प्रत्यावर्तन कराया गया है, जिसमें पोल लगाने की स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिससे ग्रामीण स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे है। ग्रामीणों में मेगजी डिण्डोर, सुखलाल डिण्डोर, मुकेश, दिनेश ने बताया कि गांव में जनप्रतिनिधि तो आते हैं, लेकिन किसी प्रकार की सुनवाई नहीं होती है। कानजी निनामा ने बताया कि पूरा गांव बरसों से अंधेरे में है। उज्ज्वला योजना से जुडने के बाद चिमनी जलाने के लिए केरोसीन भी नही मिलता है। मोबाइल चार्जिंग के लिए भी करीब दो से तीन किलोमीटर दूसरे गांव में जाना पड़ता है।

कई बार गुहार, नहीं दिया ध्यान
सरपंच बहादुर सिंह मईडा ने बताया कि ग्राम पंचायत बारी ग्राम में करीब 90 घरों में आजादी के बाद से आज दिन तक बिजली उपलब्ध नहीं हुई। इस सम्बन्ध में पूर्व में कई बार प्रशासन को मौखिक व लिखित में अवगत कराया जा चुका है, फिर भी ग्रामीणों को विद्युत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। राजस्व वाक में करीब 450 लोग निवास करते हैं, जिनमें 100 से अधिक बच्चे भी स्कूल कॉलेज में अध्ययनरत है। बच्चों को शिक्षा के लिए भी पलायन करना पड़ रहा है। गांव जंगल से सटा होने से रात्रि में बिजली के अभाव में अंधेरे में जानवरों के हमले का भी भय बना रहता है। ग्रामीणा ने कई बार विभागों में बिजली कनेक्शन की फाइलें जमा कराई, लेकिन अभी तक एक भी विद्युत कनेक्शन नहीं दिया गया है।