scriptBanswara: The birth and initiation of God took place with reverence | बांसवाड़ा : श्रद्धा से हुई भगवान के जन्म व दीक्षा कल्याणक की क्रियाएं | Patrika News

बांसवाड़ा : श्रद्धा से हुई भगवान के जन्म व दीक्षा कल्याणक की क्रियाएं

आदिनाथ मंदिर में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा

बांसवाड़ा

Published: November 08, 2021 02:02:57 am

बांसवाड़ा. श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मोहन कॉलोनी-रातीतलाई में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सान्निध्य एवं पं. आशीष पुण्यांश के निर्देशन में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के अन्तर्गत रविवार को भगवान के जन्म कल्याणक की क्रियाएं की गई।
इस अवसर पर भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। सौधर्म इन्द्र लोकेन्द्र नश्नाव, शचि इंद्राणी ममतादेवी का संवाद किया गया एवं लघु नाटिका की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद पांडुक शिला पर जन्माभिषेक के लिए शोभायात्रा ने प्रस्थान किया। अध्यक्ष पवन कुमार नश्नावत व महामंत्री मनोज जैन ने बताया कि शोभायात्रा में माता-पिता बनने का लाभ कांतिलाल विमला देवी रजियावत ने किया। सौधर्म इन्द्र लोकेन्द्र ममता देवी नश्नावत, कुबेर इन्द्र जिनेन्द्र साधना देवी रजावत, ईशान इन्द्र राकेश कुमार सुनिता देवी रजावत, प्रथम जन्माभिषेक कलश लाभार्थी राहुल नश्नावत, द्वितीय लाभार्थी अजय कुमार सुंद्रावत, महायज्ञ का लाभ नायक महावीर अलका देवी नश्नावत रहे। पांडुक शिला पर प्रतिष्ठा के सभी बड़े इन्द्रों ने भगवान का अभिषेक किया। तृतीय कलश का लाभ चिमनलाल वोरा, शांतिधारा अजबलाल वोरा, महाआरती का लाभ कांतिलाल हथाई ने लिया। दोपहर में नाभिशय का दरबार आयोजित किया गया व दीक्षा कल्याणक क्रियाएं की गई। नीलाजंना सिमरन नश्नावत ने नृत्य की प्रस्तुति दी। राजा भरत की जितेन्द्र रजियावत व बाहुबली की जतिन गंगावत ने भूमिका निभाई। इस अवसर पर आदि कुमार की महामुनि दीक्षा भी हुई। केशलोचन लाभार्थी डा. दिनेश कुमार जैन रहे। पवन कुमार वोरा एवं सुनील कुमार नश्नावत ने शाम को नव दीक्षार्थी दीदीयों की गोद भराई की रस्म अदा की। आभार सहमंत्री रमेश रजावत ने व्यक्त किया।
'औरों के लिए भी करें प्रार्थनाÓ
इधर, बाहुबली कॉलोनी में आर्यिका अर्हमश्री माताजी ने प्रवचन में कहा कि व्यक्ति को अपने दिन की शुरुआत प्रभु की प्रार्थना से करनी चाहिए। स्वयं के लिए प्रार्थना हर व्यक्ति करता है। हम अपने व अपनों के लिए प्रार्थना करते हैं, परंतु गैरों के लिए करना कठिन है। जैन संत-साध्वी औरों के लिए प्रार्थना करते। विश्व में शांति की प्रार्थना सभी को करनी चाहिए। मन से की गई प्रार्थना शक्तिशाली होती है और साकार रूप लेती है। प्रवक्ता महेंद्र कवालिया ने बताया प्रात: गुरु मां के सान्निध्य में शांतिधारा, पंचामृत एवं स्वाध्याय की गई। सायंकालीन गुरु मां की आरती उतारी गई।
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