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बांसवाड़ा : जनजाति संस्कृति अनूठी, इससे सीखने की दरकार

जीजीटीयू और वी क्लब की ओर से वेबिनार

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बांसवाड़ा : जनजाति संस्कृति अनूठी, इससे सीखने की दरकार

बांसवाड़ा : जनजाति संस्कृति अनूठी, इससे सीखने की दरकार

बांसवाड़ा. जनजाति संस्कृति अनूठी है। इसमें परस्पर सहयोग और प्रकृति प्रेम का गुण विद्यमान है। इससे सीखने की दरकार है। गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय और वी-क्लब की ओर से आयोजित वेबिनार में वक्ताओं ने यह बात कही। अध्यक्षता कर कुलपति प्रो. आईवी त्रिवेदी ने कहा कि जनजाति समाज प्रकृति पूजक रहा है। वृक्षों को देवतुल्य मानकर पूजन किया जाता है। समाज में एक दूसरे का सहयोग व विभिन्न अवसरों पर गीतों की लम्बी श्रंृखला है। परम्पराएं तथा जड़ी बूटियों से संबंधित ज्ञान को संरक्षित करने की दरकार है। विश्वविद्यालय इस दिशा में प्रयास कर रहा है। जनजाति म्यूजियम की कार्य योजना बनाई है। मुख्य वक्ता डा. मालिनी काले ने कहा कि जनजाति के गीत संगीत फिजाओं में मिठास घोलते हैं। हर अवसर पर तुरंत गीतों की रचना संस्कृति में महत्वपूर्ण है। उन्होंने जनजाति विषयों से जुड़े विविध शोध की जानकारी दी। मुख्य अतिथि वी क्लब अध्यक्ष मनीषा भट्ट, विशिष्ट अतिथि रत्ना अय्यर ने भी जनजाति संस्कृति से जुड़े अनुभव साझा किए। अतिथियों का स्वागत लक्ष्मण परमार ने किया। इस अवसर पर क्लब की अनिता मेहता, रुचि भार्गव, संतोष गुप्ता, अनिता भण्डारी, अंजना कुबावत, प्रतिमा सर्राफ आदि उपस्थित रहे। संचालन डा. अशोक काकोडिय़ा ने किया। डा. एमपी सिंह ने आभार व्यक्त किया।

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