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बदलती रहीं पंचायतों की चौखट, पर नहीं बदले हालात

Rajasthan

साबला पंचायत समिति क्षेत्र के मोदरा गांव का मामला
राजनीतिक व प्रशासनिक उपेक्षा : तीन पंचायतो में रहने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव
बृजमोहन चौबीसा
साबला। पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत गामड़ी में स्थित मोदरा गांव लम्बे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। जनजाति बाहुल्य क्षेत्र का यह गांव करीब 60 से अधिक आदिवासी बस्तियों से जुड़ा है। पिछले करीब 50 वर्षों में परिसीमन के चलते मोदरा तीन पंचायतों का हिस्सा बन चुका है, लेकिन पंचायत बदलने के बावजूद गांव की मूलभूत सुविधाओं की तस्वीर नहीं बदल पाई। यहां पर अपेक्षित सीसी सड़के,पेयजल के लिए हैंडपम्प, स्वास्थ्य केंद्र, रोड लाइट और सिंचाई जैसी कई जरूरी सुविधाओं के लिए ग्रामीण आज भी मोहताज हैं।
ग्रामीणों के अनुसार मोदरा गांव शुरुआत में गामड़ी,फिर सोलज पंचायत में शामिल था। इसके बाद करीब 20 वर्षों तक खानन पंचायत में रहा और फिर दोबारा सोलज पंचायत से जोड़ा गया। हाल ही में हुए परिसीमन के दौरान में एक बार फिर मोदरा को गामड़ी पंचायत में शामिल कर दिया गया। ऐसे में करीब 5 दशक में पंचायतों की चौखट बदलती रही, लेकिन गांव का विकास उस गति से नहीं हो पाया। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार पंचायत बदलने के साथ विकास की उम्मीद जगी, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी रहीं।
नहर गुजर रही, खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी
मोदरा में सिंचाई के लिए माही नहर की वितरिका गुजर रही है, लेकिन जर्जर और खस्ताहाल होने से इसका पूरा लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा। ग्रामीणों के अनुसार वितरिका की हालत खराब होने के कारण सिंचाई का पानी खेतों तक पहुंचने के बजाय कई जगह सड़कों पर बहता रहता है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है और नहर की सुविधा होने के बावजूद इसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा। गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से ग्रामीणों को उपचार के लिए निठाउवा, गनोड़ा, साबला सहित अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी संख्या में आदिवासी बस्तियों से जुड़े गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होना जरूरी है।
पंचायत बदलने से दस्तावेजी परेशानी भी बढ़ी
ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार पंचायत बदलने से राजकीय एवं निजी दस्तावेज भी काफी हद तक प्रभावित होते हैं। पंचायत का नाम बदलने के कारण विभिन्न सरकारी अभिलेखों के साथ आधार, राशन कार्ड, जन आधार सहित अन्य दस्तावेजों में पता संबंधी जानकारी को लेकर दिक्कतें आती हैं। दस्तावेजों में संशोधन के लिए ग्रामीणों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे विकास संबंधी समस्याओं के साथ दस्तावेजी स्तर पर भी ग्रामीणों को काफी परेशानियों और दुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे बदली पंचायतें
ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन दशक में मोदरा कई बार पंचायत बदल चुका है। परिसीमन के दौरान गांव को अलग-अलग पंचायतों में जोड़ा गया, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के विकास की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत बदलने की राजनीति में गांव विकास के मामले में पिछड़ता चला गया। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, रोड लाइट और सिंचाई सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ माही नहर की वितरिका की मरम्मत कराने की मांग की है।

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इनका कहना
जब मोदरा हमारी पंचायत में था, उस दौरान विद्यालय को जोड़ने व मंदिर तक सीसी सड़क बनाई। पेयजल के लिए हैडपम्प भी लगवाए गए, अब परिसीमन के बाद यह सोलज पंचायत के अधीन है।
लालशंकर मीणा तत्कालीन सरपंच ग्राम पंचायत खानन।

मोदरा गांव के विकास को लेकर तत्पर रही हूं। सीसी सड़कें, विद्यालय की चार दीवारी, पीएम आवास के साथ अन्य योजनाओं का लाभ व विकास के कार्य कराए गए। पंचायत के बजट के अतिरिक्त न तो प्रधान मद और न ही विधायक मद से कोई बजट मिला । अब मोदरा पुनः गामड़ी पंचायत में चला गया है।
सविता मीणा प्रशासक
ग्राम पंचायत सोलज।