बांसवाड़ा. सूर्यदेव की आराधना के लोक पर्व सूर्य षष्ठी (डाला छठ) जिले में निवासरत पूर्वी उत्तरप्रदेश, बिहार, उड़ीसा के निवासियों ने शनिवार को श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया। श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर खुशहाली, संतान रक्षा की कामना की। श्रद्धालुओं ने रविवार सुबह उदित सूर्य को अघ्र्य देकर व्रत का उद्यापन किया। दाहोद मार्ग स्थित नाथेलाव तालाब पर अपराह्न बाद से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे। इससे पहले ही घरों में छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई। अपराह्न बाद एक-एककर श्रद्धालु तालाब स्थित घाट पर पहुंचे। पुरुष बांस की टोकरी में आम की लकड़ी और मिट्टी के चूल्हे पर शुद्ध घी और गेहूं से निर्मित ठेकुआ, ऋतुफल, गन्ना, फूल आदि रखकर पहुंचे, वहीं महिलाएं कांच बांस ही बहंगिया लचकत जाए…, राह चले पूछे रे बटोहिया, ई भार किकरा के जाय…, केलावा जे फटेला धवद से ओइपर सुगा मेढऱाय… सुनी हो बिनतिया हमार ओ छठ माई…, जैसे लोक गीत गाते हुए पहुंची। नाका से लेकर नाथेलाव तालाब के मार्ग पर श्रद्धालुओं के रैले दिखे। घाट पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित किए। छठ मैया की पूजा की। बच्चों ने आतिशबाजी की। मन्नत लेने और छोडऩे वालों ने जल में खड़े रहकर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य चढ़ाया। श्रद्धालु पारम्परिक लोकगीत गाते हुए अपने घर लौटे। दीप जलाए और गीत गाए। इसके बाद मध्यरात्रि बाद श्रद्धालु पुन: घाट पर पहुंचे और कोसी भरने के बाद छठ माई की मनुहार कर अपने घर लौटने का निवेदन किया। वहीं घाट पर अशोक व्यास व कृष्णा व्यास ने पूरी रात भजन-कीर्तन किए। सूर्योदय की पहली किरण प्रस्फुटित होते ही अघ्र्य समर्पित करेंगे। महिलाएं लोक गीत गाकर तिलक-चंदन की रस्म अदा करेंगी।
परम्परागत तरीके से की गई भगवान सूर्य की पूजा : – वैदेही बिहारी समाज संस्थान की ओर से घाट पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थी। इस दौरान अध्यक्ष संजय गुप्ता, कुंदन मिश्रा, लालबाबू बिहारी, धर्मेंद्र मिश्रा, विजय यादव, राजेश यादव, अर्जुन यादव, अमरेंद्र मेहता, जितेंद्र पाल, सुरेंद्र यादव, सुदर्शन यादव, अशोक व्यास आदि उपस्थित रहे। ठीकरिया. कार्तिक शुक्ल पक्ष की छठ परंपरागत मनाई। छठ महापर्व पर भक्ति भाव से जलाशयों में खड़े होकर बिहारी समाज समेत अन्य लोगों ने अस्त होते सूर्य को अघ्र्य चढ़ाया। परम्परागत गीत व भजनों के साथ भगवान सूर्य की पूजा की गई। ठीकरिया तालाब पर दोपहर बाद से ही लोगों का आना शुरू हो गया। सिर पर भगवान को चढ़ाए जाने वाले अघ्र्य व पूजा सामग्री को लिए नंगे पांव तालाब पर पहुंचे। घर पर छठ प्रसाद ठेकुआ व चावल के लड्डू बनाए। गन्ने के रस से बने चावल-दूध का पि_ा और रोटी बनाई। पण्डित गणेश त्रिवेदी के सान्निध्य में बांस की टोकरी में फल व अन्य सामग्री के साथ छठव्रती तालाब पर एकत्र हुए एवं छठ मैया की पूजा की। अवदेश सिंह ने बताया कि सप्तमी की सुबह उदय होते सूर्य को अघ्र्य चढ़ाया जाएगा।