बांसवाड़ा : वाटिका में युवा चौकीदार और मासूम बेटे की लाश मिली, करंट से मौतों का कयास

सुरक्षा के लिए की तारबंदी में लगाए करंट से हादसे के संकेत, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका, सीसीटीवी फुटेज से हकीकत खुलने के आसार

By: Varun Bhatt

Published: 07 May 2021, 09:34 PM IST

बांसवाड़ा. रतलाम रोड स्थित दीप वाटिका में गुरुवार को संदेहास्पद परिस्थितियों में युवा चौकीदार और उसका सात साल के मासूम बेटे का शव मिला। मौका मुआयने पर प्रथम दृष्ट्या पुलिस को यहां सुरक्षा के लिहाज से नंगे तार की गई बाड़ाबंदी से करंट से मौतों के संकेत मिले। हालांकि परिजनों ने अनहोनी की शंका जताकर यहां सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से तत्काल जांच की मांग की और अड़ गए। इसके चलते घंटों तक शव मौके पर पड़े रहे। बाद में पुलिस की समझाइश पर लोग शांत हुए और शाम को शव एमजी अस्पताल की मोर्चरी भेजे जा सके।
पुलिस के अनुसार घटना की जानकारी सुबह करीब ११ बजे मृतक चौकीदार उपला घंटाला निवासी ३० वर्षीय परमेश पुत्र इंदू निनामा के परिजनों के वाटिका पहुंचने पर हुई। परिजनों के अनुसार घर में वैवाहिक कार्यक्रम के चलते परमेश को तडक़े से कई बार फोन किए, लेकिन कॉल रिसीव नहीं किए गए। इससे शंका उपजी तो परमेश का बहनोई हड़मतिया निवासी वीरचंद पुत्र देवजी डामोर और बड़ा भाई देवीलाल वाटिका पहुंचे। यहां मैन गेट पर भीतर से ताला लगा पाकर कई बार आवाजें लगाई। कोई प्रत्युत्तर नहीं मिला, तो इनमें से एक गेट पर चढक़र भीतर कूदा। यहां खुले में बनाए कीचन के पास परमेश और उसके सात साल के बेटे राजेश के शव मिले। फिर ताला तोडक़र गेट खोला। इत्तला पर कोतवाली से पुलिस दल और उधर उपला घंटाला से अन्य परिजन भी पहुंच गए। सीआई मोतीराम सारण ने बताया कि दोनों शव काले पड़े हुए और अकड़े हुए थे। कीचन के पास जीआई के खुले तार की बाड़ाबंदी दिखी, जो एक स्वीच बोर्ड से जुड़ी थी। इससे कयास लगा कि परमेश ने रात में चौकीदारी के दौरान नींद लगने पर आसपास सुरक्षा रहे, इसके लिए तारबंदी कर उसे करंट से जोड़ा हुआ था। संभवत: रात को बालक उठा और तार का भान नहीं रहने से चपेट में आ गया। फिर उसे बचाने के प्रयास में परमेश को भी करंट लगा और वह भी ढेर हो गया। दोनों के शव एमजी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाए गए हैं। अब पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुक्रवार को होगी।
भाई ने जताई पुराने चौकीदार पर शंका
इससे पहले यहां वाटिका में मृतक के भाई देवीलाल और परिजनों में परमेश के साथ अनहोनी की आशंका जताई। उन्होंने बताया कि परमेश तीन-चार महीने पहले ही यहां चौकीदारी के लिए लगा था। इससे पहले कोई और व्यक्ति चौकीदार था, जिसे सेठ ने निकाल दिया। इस पर उसने आकर देख लेने की धमकी दी थी।
तत्काल जांच और कार्रवाई के लिए अड़े परिजन
अपराह्न तक यहां परिजन अड़े रहे। उन्होंने वाटिका के सीसीटीवी फुटेज चैक कर जांच और कार्रवाई की मांग की, लेकिन वाटिका मालिक डॉ. दीपक नेमा मौके पर नहीं आए। तब परिजनों ने संतुष्टि नहीं होने तक शव उठाने से इनकार कर दिया। इस पर सीआई सारण और सूरजपोल चौकी प्रभारी रघुवीरसिंह ने उपला घंटाला से आए जनप्रतिनिधियों व परिजनों को मौके के हालात बताकर शांत किया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। बाद में शव मोर्चरी भेजे जा सके।
दाहोद के लीड होल्डर को बुलवाया
एएसआई सिंह के अनुसार यहां वांटिका में सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल रूम लॉक होने से फुटेज देखे नहीं जा सकते। पूछताछ से पता चला कि वाटिका का मालिक डॉ. दीपक नेमा है। उनसे बात की, तो उन्होंने इसे दाहोद के एक जने को संचालन के लिए लीज पर दिया होना बताया। उसी सेठ ने परमेश को यहां चौकीदारी पर रखा था। नेमा मौके पर नहीं आए, तो मामले की जानकारी देने पर लीज होल्डर अपराह्न में दाहोद से सेठ बांसवाड़ा के लिए रवाना हो गया, लेकिन शाम तक नहीं पहुंचा। अब घटनाक्रम की हकीकत कैमरे ऑन होने पर फुटेज मिलने से ही स्पष्ट होगी।

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