
फादर्स डे पर शहीद हर्षित भदौरिया के पिता ने बयां किए जज्बात : मेरे बेटे ने मेरा सपना पूरा किया, ऐसा बेटा हर पिता को मिले
बांसवाड़ा. ‘मेरा सिर्फ एक बेटा था। उसके जन्म के बाद से ही मैंने सोचा था कि उसे सेना में भेजना है। मेरे पिता ने फौज में रहकर देश की सेवा की। मैं नहीं कर पाया तो मेरे बेटे ने मेरा सपना पूरा किया। ऐसा बेटा हर पिता को मिले। इतना कहते ही लंबी खामोशी छा गई और आंखें डबडबा गई। कुछ देर ठहरने के बाद बोले अब सब कुछ बदल सा गया है। परिवार को संभाल रहा हूं। शायद दर्द कम कर सकूं।’ यह कहना है शहीद हर्षित भदौरिया के पिता राजकुमार भदौरिया का। फादर्स डे की पूर्व संध्या पर राजस्थान पत्रिका से बातचीत में उन्होंने बेटे को फौज के लिए तैयार करने से लेकर परिवार को संभालने तक की जिम्मेदारियों को यूं बयां किया।
बेटे को हिम्मत दी
मेरे पिता भी फौज में थे। मैं युद्ध और सीमा के हालातों से वाकिफ हूं। जब पता चला कि हर्षित की पोस्टिंग कूपवाड़ा है तो काफी असहज महसूस करने लगा था। जब भी उसका फोन आता तो उसको हिम्मत और सब्र से काम लेने की बात करता और उसको देश सेवा के लिए प्रेरित करता। बेटे की शहादत के बाद पत्नी ज्योति की तबीयत नासाज रहने लगी है। बेटी भी पढ़ाई के लिए उदयपुर रह रही है। घर पर मैं और पत्नी अकेले हैं। उसकी तबीयत खराब होने के कारण सब कुछ मुझे ही देखना पड़ता है। पत्नी का ख्याल रखना और घर के सारे कामों को देखना अब मेरी जिन्दगी का हिस्सा बन चुके हैं।
हौसले से यूं बढ़ रहे
डबडबाई आंखों से हर्षित के पिता ने बताया कि मैं तो रो भी नहीं सकता, घर जो संभालना है। लोग समझते हैं कि पिता को दर्द नहीं होता। मैं जानता हूं कि बेटे के जाने के बाद मुझे कितनी तकलीफ हुई। हां यह जरूर है कि पत्नी और बेटी की तरह रो नही सकता। घर के साथ उन्हें भी संभालना है। मैं टूटा तो सब टूट जाएगा। शायद इसलिए ही पिता हूं...।
Published on:
17 Jun 2018 01:58 pm
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