
Father's Day 2018 Inspirational story : बेटी को पढ़ा लिखाकर दूर की खुद के अनपढ़ होने की टीस
गुरुदत्त राजवैद्य/हरदा। संतान को खुद से आगे देखने की तमन्ना हर एक पिता की होती है। चाहे इसके लिए कितना भी परिश्रम क्यों न करना पड़े। यही करके दिखाया है बारजा गांव के आदिवासी मजदूर भंवरसिंह कलम ने। कड़ी मेहनत कर विपरीत परिस्थितियों में बच्चों को पढ़ाया। उनकी मेहनत रंग भी लाई। तीसरी संतान बेटी कीर्ति ने हायर सेकंडरी (कला संकाय) में प्रदेश के टॉप टेन में आठवें स्थान पर आकर परिवार का वैभव बढ़ा दिया। रिजल्ट घोषित होने के दिन एक पल तो उन्हें अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हुआ। यह जानने के बाद हंसमुख स्वभाव के भंवरसिंह इस खुशी में इतने खो चुके थे कि उनकी भूख-प्यास ही मिट गई। इस खबर ने उनकी खुद के अनपढ़ रहने की टीस दूर कर दी थी।
नाले में बाढ़ होने तब हाथ पकड़कर कराते थे पार
टिमरनी के समीप बारजा गांव की बस्ती में रहने वाले भंवरसिंह के मुताबिक बारिश में घर के सामने का रास्ता कीचड़ से भरा रहता था। गांव के स्कूल तक जाने के लिए नाला पार करना पड़ता है। इससे उन्होंने अपने बच्चों का स्कूल जाना बंद नहीं कराया। नाले में बाढ़ आने पर वे बच्चों का हाथ पकड़कर पार कराते थे। छुट्टी के दौरान भी उन्हें लेने जाते थे।
बेटी के साथ बाइक पर घूमने का अपना ही मजा
भंवरसिंह ने बेटियों को कभी पीछे नहीं रखा। बाइक खरीदी तो आरती इसे चलाना सीख गई। अब वह माता-पिता व भाई-बहनों को बैठाकर फर्राटे से बाइक दौड़ाती है। भंवरसिंह के मुताबिक बेटी के साथ बाइक पर सैर करने का अपना ही मजा है।
बरसूद से होता है परिवार का भरणपोषण
भंवरसिंह ने बताया कि वे 5000 रुपए मासिक पर किसान के यहां बरसूद (मजदूरी) करते हैं। पहले इतना पैसा नहीं मिलता था। उनकी पत्नी शारदाबाई ने मजदूरी में हाथ बंटाकर परिवार चलाने में हमेशा मदद की। बड़ी बेटी लक्ष्मी को 12वीं तक पढ़ाया। दूसरे नंबर की आरती बीए फाइनल ईयर में है। प्रदेश की हायर सेकंडरी मैरिट में स्थान बना चुकी कीर्ति भी अब उसके साथ टिमरनी के कॉलेज में पढऩे जाएगी। बेटा सतीष 11वीं तथा सबसे छोटी बेटी दुर्गा 5वीं कक्षा में पढ़ती है। खाली समय में बच्चे भी मजदूरी कर परिवार को मदद करते हैं।
Published on:
17 Jun 2018 12:15 pm
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