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बांसवाड़ा

आराध्य को अपने ह्रदय की गहराइयों में अनुभूत करें : पं. शास्त्री

श्री रामचरित मानस मंडल के तत्वावधान में कॉलेज मैदान 11 दिवसीय धार्मिक महानुष्ठान

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बांसवाड़ा. साधना में आराध्य को अपने ह्रदय की गहराइयों में अनुभूत करने के लिए भावों का प्राकट्य तब होता है, जब हम अपने व्रत और संकल्प के प्रति तत्परता से स्वयं को समर्पित कर दें, क्योंकि प्रभु शब्दों से परे हैं। जिन्हें हम भजन सुनाकर ध्यान करते हुए या मंदिरों में उन्हें तब तक नहीं पा सकते हैं, जब तक हम अपने भीतर के अहंकार को न त्यागें। और सांसारिक वृतियों से निवृत्ति होते हुए उनके प्रति पूर्ण रूप से अर्पित न हों।
यह उद्गार व्यासपीठ से पं. नंदकिशोर शास्त्री ने श्री रामचरित मानस मंडल के तत्वावधान में कॉलेज मैदान 11 दिवसीय धार्मिक महानुष्ठान के तहत बुधवार को कहे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो साधक इस साधना में संबंध है। उन पर पुरोधाओं के पुण्य की अनुकंपा है। वह बड़े भाग्यशाली हैं। जिन पर प्रभु की कृपा से उन्हें यह दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ। ऐसे में साधनारत साधकों को पद प्रतिष्ठा और धन समृद्धि के अहंकार को त्याग कर तन और मन को पूरी तरह से आराधना में लगाने का सच्चा भाव अपने भीतर चैतन्य करने की महती आवश्यकता है, तब ही भक्तवत्सल हनुमान महाराज की अनुकंपा स्वतः बरसते अनुभूत होने लगेगी।

व्यासपीठ का पूजन एवं यजमानों का सम्मान
साधना व्यासपीठ के मुख्य यजमान श्यामनाथ जोशी परिवार, भगवान लाल जोशी, मधु राजेंद्र कुलश्रेष्ठ, सावित्री माधवलाल जोशी, चेतन भाई, अश्विन शाह, केसरबाई जोशी, जतनदेवी जोशी, नरेश जोशी तथा गोविंद गुरु विश्वविद्यालय के कुलपति इंद्रवर्धन त्रिवेदी ने भी व्यासपीठ का पूजन किया।
व्यासपीठ से यजमानगणों में शारदा शांतिलाल पटेल, आशा राजेंद्र राठी, नितेश सुखलाल पंचाल हंसा रमनलाल पटेल, अरविंद भावसार, सुरेश गर्ग, अक्षय तेजकरण कंसारा, हरिलाल गर्ग, हरतालिका भोई, लक्ष्मी कटारा, शांतादेवी, खुशमोहन वैष्णव, विश्वेश्वर जोशी, विट्ठल गर्ग, ललित कलाल, पार्वती कलाल, नवीन, हरीश पंचाल, अलका मेहता आदि का व्यासपीठ पर कुलपति त्रिवेदी द्वारा स्मृति चिन्ह व उपरणा ओढ़ाकर सम्मान किया गया।
वनेश्वर महादेव मंडल, राधा सखी महिला मंडल, श्रीराम महिला सत्संग मंडल, श्रीराम महिला मंडल, श्रीराम कृष्णसत्संग मंडल, श्रीराम मंडल, अखिल विश्व गायत्री परिवार, अश्विन शाह, निशा शाह, चेतक कॉम्प्लेक्स महिला मण्डल, माया शाह, गजेंद्र गुप्ता, शकुंतला गुप्ता, भारती जोशी, किरण काण्डा, पुष्पेंद्र पंड्या, हरभगवान धींगरा, मधुसूदन व्यास, हितेश वैष्णव, गोविन्द अग्रवाल, सुरेश जोशी, कमलेश जोशी, श्यामा राणा, शीतल भंडारी, मनोहर जोशी पुष्पेंद्र पंड्या, रामशंकर जोशी, डॉ मुकेश शर्मा श्री राधा कृष्ण शंख मंदिर व्यवस्था एवं विकास समिति अध्यक्ष राजेश भावसार, महेंद्र देवारा ,शास्त्री नवनीत पंड्या, राजेश व्यास, कृष्णकांत देवारा, उमाशंकर शर्मा, पवन भावसार, कीर्ति व्यास आदि पदाधिकारियों ने दोनों व्यासपीठ का स्वागत सत्कार किया। संचालन नरहरिकांत भट्ट ने किया।
सन्त सहज और सरल स्वभाव के होते है – पं. शशिशेखर
सन्त सहज और सरल स्वभाव के होते है उनमें कोई दोष नहीं होता, उनके हृदय मंे सद्गुणों का वास होता है। मक्खन जब गर्मी मिलती है तब पिघलता है। किन्तु संतों का हृदय तो दूसरों के दुखो से व्यथित होकर पिघल जाता है। आज समाज में संतो के अनुसरण की परम्परा विलोपित होने लगी है। ईर्ष्या और द्वेष का प्रभुत्व बढने लगा है। जब-जब दुर्जन सज्जन की प्रतिष्ठा की पूछ मंे ईर्ष्या की आग लगाता है तब-तब उस पर प्रभु कृपा बरसती है और उसकी प्रतिष्ठा की पूछ निरन्तर बढ़ी होती चली जाती है। जैसा कि रावण ने लंका मंे हनुमानजी की पूंछ मे ंआग लगाई तो वह अपने वैभव की बनी सोने की लंका को आग लगा बैठा यह उद्गार बालव्यास शशि शेखर महाराज ने हनुमन्त कथा की पूर्णाहूति पर महती धर्मसभा में व्यक्त किये। उन्होनें कहा कि रघुवीर जिसके हृदय में होते है उनमें कोई भेद नहीं होता, उनके दिलों की खराबी सब दूर हो जाती है। जैसे केमरे से बाहर के चित्र तो आ जाते है। किन्तु भीतर के विकारों के लिए एक्स-रे रूपी दूसरे केमरे की आवश्यकता होती है। हमारी स्थिति बड़ी विकट है। हम दिल लगाते है दुनिया में और दिमाग लगाते है भगवान में। अगर दिल्लगी भगवान से हो जाये है हमारा जीवन धन्य हो जाता है।
उन्होनें हनुमानजी महाराज के प्रभु प्रताप का सुन्दर वर्णन करते हुए दोहा चौपाई और सोरठा के दौरान विस्तार से उनकी महिमा का गुणगान किया। वहीं वाद्य यंत्रों की थाप पर भक्ति संगीत की सुर सरिता के बीच अनेक प्रभु भक्तों को प्राप्त परमात्मा की शरणागति को काव्यात्मक अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि हम हर परिस्थितियों में प्रसन्न रहे, भगवान से प्रेम करे उस पर विश्वास करे। वह अपने की भक्तों की सहायता हर पल तैयार है किन्तु इसके लिए हमारा भाव परमार्थ का होना चाहिए। प्रभु प्रेम से प्रकट होते है। स्वार्थ उन्हे कभी रिझा नहीं सकता। प्रेम और विश्वास का हृदय में वास हो जाता है तब परमात्मा हमारे साथ हो जायेगा और हमारें संकल्प पूरे होने लगंेगे। यहीं हनुमन्त कथा का सार है।
आज जयाकिशोरी के श्रीमुख से श्रृद्धालु सुनेंगे नानी बाई का मायरा
श्रीरामचरित मानस मण्डल के तत्वावधान में कॉलेज मैदान में चल रहे 11 दिवसीय हनुमान चालीसा के दौरान गुरूवार को अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातनाम कथाकार जया किशोरी के श्री मुख से तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा कथा का श्रीगणेश दोपहर 3.30 बजे से होगा। जिसे सुनने के लिए राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों के अलावा देश के विभिन्न राज्यो से भी उनके अनुयायियों का तांता लगेगा। जिसे लेकर मण्डल द्वारा व्यापक तैयारियों सिलसिला जारी है। कथा व्यासपीठ के पाण्डाल और अधिक किये जाने में जहां जूटे है वहंी व्यासपीठ को भी सुन्दर सज्जित किये जाने के साथ आगन्तुक श्रद्धालुओं के लिए व्यापक प्रबन्ध किये जा रहे है।

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