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US Israel-Iran War: युद्ध की आंच सड़कों पर भी: डामर की कीमत दोगुनी, 100 करोड़ की सड़कों का निर्माण ठप

US Israel-Iran War: इजराइल-अमरीका और ईरान युद्ध की तपिश में जिले में सड़कों का निर्माण भी प्रभावित हुआ है। डामर और डीजल की कीमतें बढ़ने से बांसवाड़ा की सड़कें अधूरी पड़ी है।
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बांसवाड़ा

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kamlesh sharma

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Updated: 16 Apr 2026, 2:50 PM IST

Road Widening

(File Photo Source - Patrika)

बांसवाड़ा। इजराइल-अमरीका और ईरान युद्ध की तपिश में जिले में सड़कों का निर्माण भी प्रभावित हुआ है। डामर और डीजल की कीमतें बढ़ने से बांसवाड़ा की सड़कें अधूरी पड़ी है। डामरीकरण व सड़क निर्माण के करीब 100 करोड़ रुपए की लागत के काम प्रभावित है।

डीजल और डामर के भावों में वृद्धि हुई है। कामों की लागत बढ़ने से अब संवेदकों ने टेंडर हो चुके प्रगतिरत कार्य भी बीच में अधूरे छोड़ दिए है। जब डामरीकृत सड़कों के वर्कऑर्डर जारी हुए, तब ईरान अमरीका युद्ध शुरू नहीं हुआ था, लेकिन युद्ध ने हालात विपरीत कर दिए। डामर के साथ ही लो डेन्सिटी मिलने वाला एवं अन्य उत्पाद ऑइल (एलडीओ), कन्ज्यूमर पंप से महंगे हो गए, जिससे कार्यों की लागत बढ़ गई है। नुकसान के डर से संवेदकों ने हाथ खींच लिए। अब ठेकेदार युद्ध खत्म होने के इंतजार में हैं, ताकि डामर व डीजल के भावों गिरावट और स्थिरता आए।

क्रेडिट में नहीं मिल डीजल रहा

ठेकेदारों को पूर्व में उनके निर्माण कार्य के लिए मिल रहा डीजल प्राइवेट पंपों से क्रेडिट में मिल रहा था, लेकिन युद्ध से उपजे तनाव के बाद प्राइवेट पंपों ने क्रेडिट में डीजल देना बंद कर दिया है और नगद में ही डीजल मिल रहा है। इन सब कारणों से संवेदकों पर आर्थिक भार अधिक पड़ रहा है।

कहां कितने काम हो रहे प्रभावित

जिले में करीब 90 किमी. सड़कों का सार्वजनिक निर्माण विभाग के अनुसार कार्य प्रभावित हुआ है। इनमें घाटोल डिविजन में सड़कों के तीन कार्य, गढ़ी डिविजन में दो, बांसवाड़ा में दो एवं कुशलगढ़ डिविजन के सड़कों के दो कार्य वर्तमान में बंद पड़े हैं।

जानें, किसके कितने बढ़े भाव

पूर्व में डामर की कीमत 47 हजार रुपए प्रति टन था। भाव अब 85 हजार रुपए प्रति टन तक पहुंच गए हैं। डामर को गर्म करने में उपयोग में आने वाला लो डेन्सिटी ऑइल भी 54 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 152 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कन्ज्यूमर पंप से मिलने वाला डीजल भी 87 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 123 रुपए प्रति लीटर पर ठेकेदारों को मिल रहा है। इससे डामरीकरण सड़क निर्माण की अनुमानित लागत दोगुनी से ज्यादा हो गई है।

निर्माण कार्य में बढ़ी लागत

ईरान-अमरीका युद्ध से तेल-गैस कारण डामर के निर्मागैस संकट के कारण हाम वर्तमान में करीब 100 करोड़ के कार्य अटके हैं। जल्द ही इन्हें ठेकेदारों से करवाया जाएगा।
मथुरालाल मीणा, एसई, सार्वजनिक निर्माण विभाग

आंकड़ों में जाने बढ़े भाव

उत्पाद-------पूर्व में--------------------वर्तमान में
डामर-------47000 रुपए प्रति टन---85000 रुपए प्रति टन
एलडीओ-----54 रुपए प्रति लीटर-----152 रुपए प्रति लीटर
कंज्यूमर पंप से तेल--87 रुपए प्रति लीटर---123 रुपए प्रति लीटर

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