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कागदी पिकअप वियर बांसवाड़ा की जान

Kagdi Pickup Wear Banswara Ki Jaan बांसवाड़ा शहर का मुख्य पेयजल स्रोत होने के साथ ही कागदी पिकअप वियर पर्यटन का मुख्य केन्द्र भी है। यहां मानसून के दौरान खोले गए कागदी के गेटों से उफन रही अथाह जलराशि के कारण लोग यहां खिंचे चले आ रहे हैं। छुट्टटी के दिनों में तो यहां मेले का ही नजारा रहता है।

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कागदी पिकअप वियर बांसवाड़ा की जान

कागदी पिकअप वियर बांसवाड़ा की जान

Kagdi Pickup Wear Banswara Ki Jaan बांसवाड़ा शहर का मुख्य पेयजल स्रोत होने के साथ ही कागदी पिकअप वियर पर्यटन का मुख्य केन्द्र भी है। यहां मानसून के दौरान खोले गए कागदी के गेटों से उफन रही अथाह जलराशि के कारण लोग यहां खिंचे चले आ रहे हैं। छुट्टटी के दिनों में तो यहां मेले का ही नजारा रहता है। माही बांध के बेकअप के सहारे करीब चालीस साल पुराना इतिहास समेटे यह कागदी पिकअप वियर शहर का खूबसूरत पर्यटन एवं रमणीय स्थल इनदिनों अनदेखी का शिकार है।

माही बांध परियोजना का हिस्सा होने एवं अथाह जलराशि के बावजूद यहां की व्यवस्था माकूल नहीं है। पानी एवं प्रबंधन के अभाव में दोनों तरणताल सूखे पड़े है। इनमें एक तरणताल तो बच्चों के लिए ही है। यहां लाई गई नौकाएं कबाड़ हो रही है। उपयोग के अभाव में तरणताल की चहारदीवारें दरकनें भी लगी है। यहां के फव्वारे भी खराब है। हीं यहां लगे फव्वारे अंतिम बार कब चलें होंगे, इसकी जानकारी भी जिम्मेदारों को ठीक से नहीं है।

पार्क बन गए चरागाह

यहां के सभी पार्कों की हालत बिगड़ी हुई है। सभी में गाजर घास की खरपतवार लहरा रही है। ऐसे में बैठना तो छोड़ कर खड़े रहना भी दुश्वार हो रहा है। फूलदार पौधों व महकते वृक्ष नहीं होने से यहा का वातावरण भी खुशगवार नहीं हो पा रहा है। घास बेतरतीब फैलने से यहां के पार्क तो चरगाह के रूप में दिखाई दे रहे हैं।
बाबा आदम जमाने के खेल उपकरण

बच्चों के खेलों के उपकरण खराब हो चुके है, कई तो जंग खा कर चोट ही दे रहे है, बाबा आदम के जमाने के उपकरण होने से बच्चें भी उनसे अब दूरी बनाने लगे है। टूटे उपकरणों की भी कोई सुध नहीं ले रहा है। बच्चों की भूल भलैय्या भी बदहाल में है। बैठने की कुर्सियों भी घास से घिरी हुई, कुछेक टूट भी चुकी है।

मेले के बाद कागदी को ही भूल गए

लोगों ने बताया कि जिला प्रशासन ने नगर परिषद व पर्यटन केन्द्र की मदद से दो माह पूर्व ही यहां हरियाली अमावस्या पर पहली बार मेला आयोजित किया, लेकिन मेले के आयोजन के बाद किसी भी विभाग ने कागदी पिकअप की सुध ही नहीं ली। ऐसे में यहां आने वाले पर्यर्टकों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां पुलिस का जाप्ता भी अवकाश के दिनों में होना चाहिए। आपदा प्रबंधन के भी यहां पुख्ता बंदोबस्त जरूरी है। यहां पीने के पानी भी सुविधा नहीं है, पिकअप के गेटों से पानी की निकासी के लिए बनाए गए घाट की सीढ़ी भी जवाब दे चुकी है। यहां केंटीन की सुविधा नहीं है।
नहीं हो रही कमाई

यहां स्टाॅल संचालकों ने बताया कि जिला प्रशासन एवं माही को यहां सुविधाएं जुटानी चाहिए, खूबसूरत पर्यटन स्थल होने के बावजूद यहां मौसम के अनुरूप भीड़ नहीं आ रही है। इससे उनकी भी कमाई नहीं हो रही है। यहां महिलाओं के लिए सार्वजनिक सुविधा तक नहीं है।

जान भी जा चुकी है
यहां माकूल आपदा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होने से गत वर्ष एक युवक की डूबने से मौत हो चुकी है, जबकि आए दिन यहां दुर्घटनाएं होती रहती है।

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