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राजस्थान : प्राकृतिक खेती में आएगी जान, सशक्त होगा किसान, 20 हजार काश्तकार होंगे लाभांवित

Zero Budget Natural Farming : किसानों को जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग के लिए किया जा रहा प्रोत्साहित

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राजस्थान : प्राकृतिक खेती में आएगी जान, सशक्त होगा किसान, 20 हजार काश्तकार होंगे लाभांवित

राजस्थान : प्राकृतिक खेती में आएगी जान, सशक्त होगा किसान, 20 हजार काश्तकार होंगे लाभांवित

बांसवाड़ा. प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से पहल शुरू कर दी गई है। पिछले राज्य बजट में मुयमंत्री अशोक गहलोत की ओर से घोषित ‘खेती में जान तो सशक्त किसान योजना’ की शुरुआत कर दी गई है। योजना में बांसवाड़ा, सिरोही व टोंक की 36 ग्राम पंचायतों के 20 हजार कृषकों को समिलित किया गया है। कृषि लागत को कम करने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने किसानों को जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाना है। इसका द्देश्य काश्तकारों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता लाने और प्राकृतिक खाद-बीज तैयार करने के लिए प्रशिक्षण तथा एक्सपोजर विजिट द्वारा प्रेरित करना है। जिसके तहत करीब 10 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

बांसवाड़ा के सर्वाधिक किसान : - पहले चरण में बांसवाड़ा की 24 ग्राम पंचायतों से सर्वाधिक 8 हजार किसानों को चयनित किया है। टोंक से 7 हजार और सिरोही से 5 हजार कृषकों को शामिल किया है। दूसरे चरण के तहत हर ग्राम पंचायत से 50-50 किसानों को प्रशिक्षण दिया जाना है। यों दिया प्रशिक्षणजिले में चयनित 8 हजार किसानों में से हर ग्राम पंचायत से 50-50 किसानों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षण ग्राम पंचायत स्तर पर किसान सेवा केंद्रों व राजीव गांधी सेवा केंद्रों पर संचालित हुए हैं। 15 प्रशिक्षण सत्रों में करीब 750 किसान समिलित हुए है। इनमें खेती के पारंपारिक तरीकों, कम सिंचाई, प्राकृतिक खाद तैयार करने आदि की जानकारी देते हुए जैविक कृषि के लिए जागरूक किया है।

अब तक बजट का गणित : - योजना के अंतर्गत जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग के क्रियान्वयन के लिए सरकार को 197.49 लाख के प्रस्ताव भेजे गए। जिसमें से 120 लाख रुपए का बजट जारी हो चुका है। बांसवाड़ा के लिए 79.30 लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा था, जिसमें से 48 लाख रुपए का बजट मिल चुका है। टोंक के लिए 67.03 लाख के प्रस्ताव के मुकाबले 42 लाख और सिरोही जिले के लिए 51.16 लाख के प्रस्ताव के मुकाबले 30 लाख रुपए का बजट उपलब्ध दिया है। योजना के अनुसार इस बजट का उपयोग राज्य स्तरीय आमुाीकरण कार्यशाला, ग्राम पंचायत स्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण, पांच दिवसीय एक्सपोजर विजिट, स्थानीय व अन्य राज्यों के सामुदायिक संशाधन व्यक्ति का मानदेय देने में किया जाना है। किसानों को बीज-पौधों के लिए सहायता राशि के रूप में 600-600 रुपए दिए जाएंगे।

इतने किसान चयनित : - टिमेड़ा बड़ा में 550, गनोड़ा, ताबेसरा, कुशलगढ़, छोटी सरवा में 500-500, सरेड़ी बड़ी में 450, बांसवाड़ा (अ), तलवाड़ा, गढ़ी, पालोदा, अरथूना, घाटोल, ामेरा, गांगड़तलाई, आनंदपुरी व सज्जनगढ़ में 300-300, बांसवाड़ा (ब), जौलाना, आंबापुरा, पड़ौली गोर्धन, वाडगुन, सल्लोपाट, फलवा, छोटा डूंगरा में 250-250 किसानों का चयन किया है।

इनका कहना है : - किसानों को रासायनिक खेती की बजाय प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित है, ताकि कम लागत में उत्पादन और फसलों की गुणवत्ता बढ़े और भूमि उपजाऊ बनी रहे। पिछले दिनों चयनित काश्तकारों को प्रशिक्षण दिया है। आगामी दिनों में उन्हें एक्सपोजर विजिट के लिए ले जाया जाएगा। - भूरालाल पाटीदार, उप निदेशक, कृषि विस्तार बांसवाड़ा