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आर्यिका धवलमतीमाता की लोहारिया में समा​धि

मंगलवार को 4 बजकर 10 मिनट पर समाधि

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आर्यिका धवलमतीमाता की लोहारिया में समा​धि

आर्यिका धवलमतीमाता की लोहारिया में समा​धि

बांसवाड़ा.लोहारिया. आचार्य विमल सागर महाराज की शिष्या आर्यिका धवलमती माता की मुनि आज्ञा सागर महाराज एवं प्रसन्न मति माताजी ससंघ के सानिध्य में हुई समाधि। लोहारिया में पिता दाड़म चंद माता कुरी देवी के कोख से जन्मी तुलसी देवी बचपन से ही धर्म मार्ग पर रूचि रहीं एवं स्थाई रूप से आहार देना, चौंका लगाना, साधुओं की सेवा करना उनका स्वभाव रहा। इनका विवाह देवचंद कोठारी से हुआ। इनके दो पुत्र एवं चार पुित्रयां थी। प्रथम गुरु आचार्य महावीर कीर्ति से दो प्रतिमा ली। धर्म मार्ग में रहकर 1234 णमोकार के निर्जल उपवास किए। लोहारिया में पहला सिद्ध चक्र विधान आपके परिवार द्वारा हुआ। 37 वर्षों से दीक्षित आर्यिका धवलमती माता ने सागवाड़ा,चितरी,ओबरी,आंतरी, आदि जगहों पर चातुर्मास कर धर्म प्रभावना की।

मंगलवार को 4 बजकर 10 मिनट पर समाधि हुई। दिगंबर जैन दशा नरसिंहपुरा समाज लोहारिया के अध्यक्ष प्रकाश बोहरा ने बताया कि माताजी की डोल यात्रा निज मंदिर से सिरावाली डूंगरी स्थल पहुंचीं। जहां मुनि आज्ञा सागर महाराज एवं प्रसन्न मति माता ससंघ के निर्देशन में पंडित नितीन जैन द्वारा समाधी की क्रिया संपन्न कराई। मेवाड़ वागड़ महासभा अध्यक्ष अशोक नश्नावत, सागवाड़ा नगरपालिका अध्यक्ष नरेंद्र खोड़निया,पवनजी गोवाडिया सेठ, महेश एवं आस पास गांव से गनोड़ा, भीमपुर, चंदुलाल जी का गडा, बांसवाड़ा, पालोदा,मेतवाला,सरेडी, आंतरी,चितरी, कुआं, सागवाडा से समाजजन मौजूद रहे।

परतापुर : हुई धर्मसभा
परतापुर. आचार्य सुंदर सागर महाराज ने मंगलवार को धर्मसभा में कहा कि भगवान महावीर का वीतराग शासन ऐसा है कि जिसे पाकर आत्मा परमात्मा बन जाती है। जिस व्यक्ति की कषाय जितनी तीव्र होगी उतना कर्म बंधन होगा। जैसा भाव होगा वैसा फल मिलेगा।मुनिराज श्रावक द्वारा नवधा भक्ति से दिया आहार ही ग्रहण करते है।

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