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दीपावली पर अली की लालटेन से रोशन होंगे हजारों घर, चीनी लाइट की बुझेगी बत्ती

मुस्लिम युवकों ने लिया देश भर में लालटेन पहुंचाने का जिम्मा, चीनी लाइटों को मात देगा

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Ashish Bajpai

Oct 25, 2016

My India will shine with Ali

My India will shine with Ali

यह दीपावली कई मायनों में खास है। पहली बार बाजार में चाइना की लाइटों को न सिर्फ मुंहतोड़ जवाब मिल रहा है, वरन पूरा देश इस मुहिम में जुट सा गया है। यह सब भी जाति-धर्म और सम्प्रदाय से उपर उठकर। बस एक प्रयास है कि देश का हर घर देसी दीयों से रोशन हों। इन दिनों बाजार में पहली बार छोटी-छोटी साइज के लालटेन की धूम है।

खूबसूरत प्यारे से यह लालटेन यकायक सबका मनमोह रहे हैं। पर, इन लालटेन को बनाने और देशभर में फैलाने के पीछे जज्बा महज इतना है कि चाइना की लाइट का हर तोड़ हम निकाल सकते हैं। खास यह है कि इस मुहिम को परवान चढ़ा रही है इस माटी के मुस्लिम युवाओं की टीम।

लालटेन का चमकता सफर

पिछले दो दिन से बाजार में लारियों पर बिक रहे लालटेन को देखकर सहज ही कदम रूक जाते हैं। इसकी बनावट, आकार और रंग नए कलेवर में है। शहर में अली मोहम्मद, जावेद, सईद अनवर और मोहम्मद अकील इन लालटेन को लेकर यहां आए हैं। इन्होंने कई स्थानीय लोगों को जोड़ा और शहर ही नहीं यहां के बड़े कस्बों तक इन लालटेनों की बिक्री कर रहे हैं। जावेद बताते हैं कि चाइना को सबक सिखाना है।

हम पहली बार यहां आए हैं और यह बताना मकसद है कि देश में कई गांवों में हर घर-घर चाइना की तरह इण्स्ट्री है और पूरा परिवार 15 से 18 घंटे काम करता है। हमारा पूरा गांव भी लालटेन बनाता है और तीन माह में पूरे गांव ने पहली बार दीपावली विशेष के छोटे लालटेन लाखों की तादाद में बनाकर देश भर में युवाआें के जरिए बिक्री के लिए भेजे हैं।

यह है रोशनी का गांव

महाराष्ट्र के आकोला जिले का मंगलूरपीर गांव। करीब दो हजार परिवार का यह गांव और यहां रहने वालों का कार्य लालटेन बनाना ही है। हिन्दू-मुस्लिम की बराबर आबादी वाले इस गांव में सब के सब रोजगार में लगे हुए है। सबका अलग-अलग काम है।

फीटिंग वाली टीम अलग है। पूरे गांव ने मिलकर तय किया कि इस बार देश भर में जहां तक संभव हो लालटेन बेचने जाएंगे। इस वक्त गांव के पांच हजार युवाओं की टीम चार-चार के गु्रप में लालटेन लेकर निकली है। पहली बार दुकानों के बजाए डोर-टू-डोर डिलेवरी भी करेंगे।

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