
राजस्थान विधानसभा चुनाव
बांसवाड़ा. विधानसभा चुनाव में एक-एक वोट की महत्ता है और इसी आधार पर चुनाव परिणाम तय होते हैं, किंतु कई बार पसंद का प्रत्याशी नहीं होने पर मतदाता वोट नहीं डालते हैं। इससे मतदान प्रतिशत घटता है। अधिकाधिक मतदान को लेकर निर्वाचन आयोग ने ईवीएम में नोटा का विकल्प दिया, किंतु गत दो चुनाव को देखें तो बांसवाड़ा में नोटा भाजपा व कांग्रेस को छोड़कर अन्य दलों व निर्दलीय प्रत्याशियों पर भारी पड़ा है। 2013 में कुशलगढ़ और 2018 में घाटोल सीट पर जीत के अंतर से अधिक नोटा में वोट दर्ज हुए थे।
बांसवाड़ा जिले की पांच विधानसभा सीटों पर गत दो चुनाव में नोटा में दर्ज वोटों के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि 2013 में कुशलगढ़ से भाजपा के भीमा भाई ने 708 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि नोटा में चार हजार 121 वोट दर्ज हुए थे। इसी प्रकार 2018 में घाटोल में भाजपा के हरेंद्र निनामा ने चार हजार 449 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी और नोटा में चार हजार 857 वोट थे।
गत चुनाव में 19 प्रत्याशी पिछड़े
वर्ष 2018 के चुनाव में जिले की पांच सीटों पर 19 निर्दलीयों को नोटा से भी कम वोट मिले थे। इसमें बांसवाड़ा विधानसभा में एक, घाटोल और कुशलगढ़ में छह-छह, गढ़ी में दो और बागीदौरा में चार निर्दलीय शामिल थे। वहीं 2013 में बांसवाड़ा में एक निर्दलीय व बसपा प्रत्याशी, घाटोल में तीन, गढ़ी में सात, बागीदौरा में दो तथा कुशलगढ़ में तीन अन्य दलों के प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले थे।
यह भी एक कारण
ईवीएम में नोटा का बटन अंतिम में होता है। चुनाव प्रचार के दौरान सबसे ऊपर नाम वाले प्रत्याशी मतदाताओं से वही बटन दबाने की अपील करते हैं। मतदान के समय नोटा को ही एक नंबर मानकर कई लोग बटन दबा देते हैं। बताते हैं कि इसमें अधिक संख्या वृद्धजनों और शारीरिक रूप से अक्षम वोटरों की होती है, जो करीब पाकर नोटा का बटन ही दबा देते हैं।
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इतने वोटा नोटा में
वर्ष 2013
बांसवाड़ा : 5381
घाटोल : 6263
गढ़ी : 6084
बागीदौरा : 7259
कुशलगढ़ : 4121
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वर्ष 2018
बांसवाड़ा : 3910
घाटोल : 4857
गढ़ी : 4619
बागीदौरा : 5581
कुशलगढ़ : 11002
Published on:
27 Oct 2023 10:14 pm
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