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बांसवाड़ा : नोटबंदी की आंच में जमीनों के सौदे झुलसे, सरकार राजस्व को तरसी

डेढ़ साल बाद भी नजर आ रहा है नोटबंदी का असर

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banswara

बांसवाड़ा. 8 नवम्बर 2016 की रात को देश के प्रधानमंत्री की ओर से भारत में नोटबंदी लागू की गई थी। जिसके बाद से पूरे देश में हलचल फैल गई थी। कुछ लोगों ने नोटबंदी के फैसले का स्वागत किया था तो कुछ ने इसका जमकर विरोध भी किया था। लेकिन नोटबंदी के भी करीब डेढ़ साल बाद भी राज्य सरकार पर इसका असर नजर आ रहा है। नोटबंदी को लेकर केन्द्र सरकार भले ही कुछ भी दावा करे, लेकिन राज्य सरकार को इसका बहुत बुरा अहसास हुआ है। नोट बंदी से पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की ओर से तय किए गए लक्ष्य धराशायी हो गए। जिले की बात करें तो इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य का महज 40 से 45 फीसदी ही राजस्व अर्जित हो पाया।

नहीं रहा खरीदी का जोर
8 नवम्बर 2016 को 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद से पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग में जमीन खरीदी का पंजीयन करने का काम बहुत कम हो गया। यही कारण है कि जहां 2016-17 में विभाग को 70 फीसदी लक्ष्य ही प्राप्त हुआ वहीं 2017-18 में करीब 40 से 45 फीसदी ही लक्ष्य प्राप्त हो सका है।

जिले को गत वित्तीय वर्ष के लिए 34 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन इसकी एवज में करीब 16 करोड़ का ही राजस्व प्राप्त हो सका है। इसके पीछे विभाग के अधिकारी एवं कार्मिक यह तो खुलकर तो नहीं मानते की नोटबंदी के चलते ऐसा हो रहा है, लेकिन कहीं न कहीं इसका प्रभाव वह इस मायने में मानते हैं कि लोगों की क्रय शक्ति नोटबंदी के बाद बहुत कम रह गई है।

बेनामी सम्पति कानून का भी डर
दूसरी ओर केन्द्र सरकार की ओर से बेनामी सम्पति कानून लागू करने के बाद भी लोगों ने जमीन एवं मकानों का पंजीयन करना कम कर दिया है। सहायक रजिस्ट्रार माजीद मोहम्मद ने बताया कि कुछ समय से यह देखने में आ रहा है कि लोगों की क्रय शक्ति कम हुई है,। इस वर्ष भी लक्ष्य पूरे नहीं किए जा सके हैं।


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