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बांसवाड़ा

Video : बांसवाड़ा में महाराणा प्रताप जयंती पर कवि सम्मेलन का आयोजन, कवियों ने श्रोताओं में भरा राष्ट्रभक्ति का जोश

हमारी आन जिंदा है, हमारी शान जिंदा है, तिरंगा यंू ही लहराए यही अरमान जिंदा है

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बांसवाड़ा. वागड़ क्षत्रिय महासभा की ओर से छह जून को महाराणा प्रताप की जयन्ती के उपलक्ष्य में मंगलवार रात यहां कुशलबाग मैदान में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने देशभक्ति की रचनाएं सुना श्रोताओं को जोश से सराबोर कर दिया। श्रोता भी तालियों के गडगड़़ाहट से वातावरण को गुंजायमान करते रहे। कवि सम्मेलन की शुरुआत सरस्वती वंदना से अनिल जैन उपहार पिडावा ने की। वागड़ी हास्य कविताओं से कवि फतहसिंह चौहान डडूका ने श्रोताओं को लोटपोट किया, तो कवि डॉ. अनिल जैन ने वीररस भरने का काम किया। उन्होंने हमारी आन जिंदा है, हमारी शान जिंदा है, तिरंगा यूं ही लहराए यही अरमान जिंदा है। हमारे मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता, शहीदों की शहादत से ये हिन्दुस्तान जिंदा है…। रचना सुनाकर श्रोताओं में राष्ट्रभक्ति का जोश भर दिया।

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वीररस के कवि सिद्धार्थ देवल उदयपुर ने राणा प्रताप के प्रण की धरती राजस्थान कहलाती है। रचना सुनाकर सब में जोश भर दिया। कवि बयाना के जगदीश खटाना ने वैभव विलासिता को छोड़-छाड़ उम्रभर झेलते रहे जो जंगलों में संताप को, खूब कष्ट पाए, किन्तु शीश को झुकाया नहीं, नानी याद करा दी मुगलों के बाप को। स्वामी भक्ति की मिसाल कर गया जो कमाल करते हैं नमन उस चेतक की टाप को, भारती की आन-बान-शान पे गंवा दी जान, सौ-सौ है प्रणाम उस महाराणा प्रताप को…। रचना सुना तालियों से पांडाल को गुंजायमान कर दिया। कवि जानी बैरागी ने आतंकियों के साथ देश की सेना के निपटने के शौर्य पर काव्य पाठ किया। फतहसिंह डडूका ने वागड़ी भाषा में रचना सुना स्थानीय श्रोताओं से आत्मीयता का संदेश दिया। उन्होंने अणा गामण याडुर्र गुरुजी औके मौके आवजु रे…। अमारे जुबे सब बढिय़ा ने बढिय़ा…। हास्य रचना सुनाई।

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सिद्धार्थ देवल ने हिंसा के उन्मादी दानव जब सीता हर लेते है, अवधपुरी की गलियों को जो विषघट से भर देते हैं। कलयुग के कोई रावण जब पिंडी से आंख दिखाते है, तब भारत के बेटे सर्जिकल स्ट्राइक कर देते हैं। रचना सुनाई। जिस पर मौजूद श्रोताओं में भी देश की सुरक्षा और राष्ट्रभक्ति का जोश भुजाओं में फडक़ता तालियों के गडगड़ाहट में सुनाई दिया। कवि सम्मेलन में हिमांशु बवंडर उज्जैन ने ए.सी की ठंडक न दे बूढ़े बरगद की छांव तो दे दे, कंक्रीट के जंगल न दे बचपन वाला गांव तो दे दे। जऱ-ज़ोरू, ज़मीन सब फुजुल है, मुझे मेरी मां के जन्नत वाले पांव तो दे दे, रचना सुनाई। सतीश आचार्य बांसवाडा गीतकार, जलज जानी बांसवाडा सूत्रधार ने भी काव्य पाठ कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। महासभा अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह आनंदपुरी के अनुसार जलज जानी के संयोजन में हुए इस कवि सम्मेलन में देररात तक काव्य पाठ का श्रोताओं ने आनंद लिया। इस दौरान वागड़ क्षत्रिय महासभा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह आनंदपुरी, खांदू महाराज प्रताप भानु सिंह, हकरू मईड़ा आदि भी मौजूद रहे।