वरुण भट्ट बांसवाड़ा
नौ साल पहले सऊदी अरब रोजगार के लिए गए शंकर की कोई खैर खबर नहीं हैं। उसके लौटकर नहीं आने पर पीछे उसकी पत्नी भी नाते चली गई। जिसके बाद से दो बेटियाें की परवरिश दादा नाकसी डोडियार कर रहे है। पिता नाकसी को बेटे का तो बेटियों को पिता का इंतजार है। उम्मीदें भी हैं, लेकिन मदद को हाथ बढ़ाने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में अभावों के बीच परिवार गुजर बसर कर रहा है। वेदना बांसवाड़ा जिले के घाटोल ब्लॉक के गांव बरोड़ा के एक परिवार की है।
आंखें भर आई, पिता बोले हमारे बाद क्या होगा बेटियों का
शंकर के पिता नाकसी बताते है कि परिवार की आर्थिक िस्थति अच्छी नहीं होने एवं कर्जा होने पर बेटा सऊदी अरब रोजगार के लिए गया । उसने दो वर्षो में जो कर्जा था, वह धीरे धीरे उतार भी दिया। उसके बाद 2013 में वो वापस गया। एक माह तक बातचीत भी हुई, लेकिन उसके बाद से उससे संपर्क ही नहीं हो पा रहा है। हम आज तक उसके फोन व लौटने का इंतजार कर रहे है। बकौल नाकसी शंकर का पता लगाने लगातार जनप्रतिनिधियों से गुहार भी लगाई, लेकिन किसी ने मदद ही नहीं की। अभी तो दोनों बेटियों को हम संभाल रहे है, लेकिन हमारे बाद इनका क्या होगा, यह चिंता हरदम सताती है। गौरतलब है कि यह परिवार वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता रखता हैं, लेकिन दस्तावेजों में विसंगति से अब तक लाभ भी नहीं मिल पाया है। ऐसे में परिवार अभावों में गुजर बसर कर रहा हैं।
बच्चों के नहीं बन रहे दस्तावेज
इधर, शंकर की दोनों बेटियाें में मनीषा 14 वर्ष एवं सविता 13 साल की है। बालिकाओं का आधार कार्ड भी अब तक नहीं बना है। नाकसी बताते है कि इस कार्य के लिए घाटोल के कई बार चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन अब तक समस्या जस की तस है। इधर, चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 के परमेश पाटीदार ने बताया कि परिवार की जानकारी मिलने पर टीम सदस्य शोभा सोनी, निशा चौहान, कांतिलाल यादव एवं कमलेश बुनकर को मौके पर भेजकर हकीकत जानी गई। पीडि़त परिवार की मदद को लेकर प्रयास शुरू किए जा रहे है।
जनप्रतिनिधियों ने भी की पुष्टि
मामले में स्थानीय वार्ड पंच नारायणलाल बताते है कि मदद को लेकर लगातार गुहार लगा रहे है, लेकिन शंकर का पता नहीं चल पाया है। पूर्व सरपंच खोमजी भाई कहते है कि युवक का परिवार कई कई वषोZं से इंतजार कर रहा है। उससे संपर्क भी नहीं हो पाया है।