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#sehatsudharosarkar: राम भरोसे मरीज, अस्पताल बने शो पीस, देखिए तस्वीरें

सेहत सुधारों सरकार मुहिम के तहत बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों पर खास रिपोर्ट  

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सरकार हर साल स्वास्थ्य पर करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा करती है, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बद से बदतर है। साधन- सुविधाएं और स्टाफ की स्थिति ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ समान है। इन हालता में कहीं सुविधाएं हैं तो उनका संचालन करने वाला नहीं है और जहां संचालन करने वाला है तो वहां सुविधाएं मय्यसर नहीं हैं। भवन है, संसाधन है तो चिकित्सक नहीं है। यह हाल उस जिले का है जहां कुछ दिन पूर्व ही 50 दिन में 81 नवजात बच्चों की मौत होने का मामला सामने आया था। बावजूद इसके स्वास्थ्य सेवाओं में अभी तक किसी तरह का सुधार नजर नहीं आ रहा है। स्वास्थ्य केन्द्रों की बदहाल स्थिति को दर्शाती पेश है ‘सेहत सुधारों सरकार ’ अभियान की पहली कड़ी।

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मेलनर्स के भरोसे घोड़ी तेजपुर पीएचसी : छोटी सरवान. पंचायत समिति के घोड़ी तेजपुर पीएचसी को अव्यवस्थाओं का गढ़ कहा जा सकता है। यहां न तो चिकित्सक हैं और न ही चिकित्सा सुविधाएं। मेल नर्स के भी तीन पद हैं, लेकिन एक ही कार्यरत है। मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है और रोजाना 50 से 60 मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं होने से मेलनर्स ही उपचार करने को मजबूर है। यहां मरीजों को भर्ती करने के लिए 6 बिस्तर हैं, लेकिन इसमें से भी दो खराब पड़े हैं, जिससे अधिक मरीज आ जाएं तो उनको फर्श पर सुलाना पड़ता है। पीएचसी में मरीजों को न तो पानी मिल पाता है और न ही यहां बिजली आती है। पीएचसी का भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया जिससे मरीज भी यहां आने से कतराने लगे हैं। ब्लॉक सीएमएचओ नरेंद्र कोहली ने बताया कि छोटी सरवन में 25 सब सेंटर है और दो पीएचसी और एक सीचसी है।

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दांत दर्द हो या आंख में तकलीफ बांसवाड़ा दौड़ो : घाटोल. सांसद मानशंकर निनामा के गृह क्षेत्र में भी स्वास्थ्य की बदतर स्थिति है। घाटोल सीएचसी में चिकित्सकों के पांच पद रिक्त हैं जिससे मरीजों को मामूली दांत दर्द हो या आंखों की कोई परेशानी हो तो उनको 30 किमी दूर बांसवाड़ा की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। बिस्तरों पर बैेडशीट लगी हुई नहीं और सुरक्षा कर्मचारियों के नहीं होने से कोई भी कभी भी चिकित्सालय के किसी भी वार्ड में आ जा सकता है। महिला वार्ड में कोई रोक टोक नहीं होने से यहां दिन भर मरीजों को मिलने आने वालों का डेरा लगा रहता है। सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र पर कहीं पंखे बंद हैं तो ट्यूबलाइट भी बंद पड़ी हुई हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में ही बॉयोवेस्ट और प्लास्टिक जलाया जा रहा है तथा जगह-जगह गंदगी फैली हुई है

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एक्सरे के लिए गुजरात की दौड़ : कुशलगढ़.जिले के सबसे बडे उपखंड मुख्यालय पर स्थित एक मात्र 100 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले 1 साल से अधिक समय से एक्सरे सुविधा बंद होने से मरीजों को गुजरात जाने को मजबूर होना पड़ रहा है, वहीं छोटी-मोटी चोट लगी हो या सर्दी जुकाम हुआ हो तो भी रोग विशेषज्ञ से उपचार लेने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। संसदीय सचिव भीमाभाई का विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद एक्सरे सुविधा बंद होने से दुर्घटना होने पर चिकित्सको के पास मरीज को अन्यत्र रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। चिकित्सालय में प्रतिदिन 250 से अधिक आउटडोर होने के बाद भी मरीजों को आधारभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसके अलावा चिकित्सालय के लिएं स्वीकृत सोनोग्राफ ी मशीन भी जिला चिकित्सालय में पड़ी हुई है तथा ईसीजी मशीन भी खराब पड़ी हुई है। करीब 4 माह से बॉयोकेमिकल मशीन खराब होने से मरीजों की जांच भी यहां नहीं हो पा रही है। चिकित्सालय में चिकित्सकों के 17 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में यहां पर मात्र 8 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। चिकित्सालय में शिशु , हड्डी, दन्त एवं आंख के रोग विशेषज्ञ नहीं होने से क्षेत्र के लोग इलाज के लिए गुजरात पर ही निर्भर हैं। कागजो में तो चिकित्सालय 100 बिस्तर का है, लेकिन स्थान की कमी के कारण वर्तमान में 77 बैड ही लगे हुए हैं। चिकित्साधिकारी डॉ अरुण गुप्ता ने बताया कि रेडियोग्राफ र का पद रिक्त होने से एक्स-रे की सुविधा नहीं मिल पा रही है। रेडियोग्राफर सहित विशेषज्ञ चिकित्सको के रिक्त पदों के लिएं समय समय पर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। तथा रेडियोग्राफर के लिए तो निविदा भी जारी कर चुके हैं।

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गनोड़ा : डाक्टरों के पद खानली, तीन साल से एक्स-रे बंद : गनोड़ा. जिले के बड़े कस्बों में शुमार गनोड़ा की चिकित्सा व्यवस्था किसी छोटे गांव से भी बदतर है। हर माह 150 से अधिक प्रसव एवं रोज का 170 से अधिक आउटडोर होने के बावजूद चिकित्सकों के पद रिक्त हैं एवं वर्तमान में दो में से महज एक ही चिकित्सक के भरोसे चिकित्सालय का संचालन किया जा रहा है। वह भी आए दिन बैठकों में व्यस्त रहते हैं, जिससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है। चिकित्सालय में तीन साल से एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है, जिसके चलते मरीजों को एक्स-रे कराने के लिए भी बांसवाड़ा तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में वैसे तो चिकित्सकों के 6 पद हैं, लेकिन इसमें से 4 खाली हैं एवं एक चिकित्सक लंबे समय से अवकाश पर है। यहां का भवन भी खण्डहर स्थिति में आ गया है एवं पंखे और ट्यूबलाइट बंद पड़ी हैं।

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परतापुर : एक्सरे एवं ईसीजी मशीनें नकारा, मरीज निजी लैब पर जाने को मजबूर : परतापुर.गढ़ी उपखंड मुख्यालय के सबसे बड़े परतापुर सामुदायिक चिकित्सालय में असुविधाओं के कारण रोगियों एवं परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। चिकित्सालय में करीब तीन वर्ष से एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है। जिसे तकनीशियन ने नकारा घोषित कर दिया है। ईसीजी मशीन भी लंबे समय से नकारा है। ऐसी स्थिति में मरीजों को निजी प्रयोगशाला में जाना पड़ रहा है। चिकित्सालय में डिजिटल एक्स-रे मशीन के लिए प्रस्ताव भी भेजे हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। चिकित्सालय में सोनोग्राफी की सुविधा नहीं होने से उन्हें अन्य शहरों में जाना पड़ रहा है। चिकित्सालय में वर्तमान में करीब 400 का आउटडोर एवं 60 का इनडोर है, बावजूद इसके कनिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक के 5 एवं एफआरयू में स्पेशलिस्ट का एक पद लम्बे समय से रिक्त है। इस संबंध में चिकित्सा प्रभारी अधिकारी डॉ. आर.मालव का कहना है कि रिक्त पदों एवं संसाधनों की कमी सहित अन्य समस्याओं को लेकर एमआरएस की ओर से शासन प्रशासन को लिखा गया।