
बांसवाड़ा. जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लचर है। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भवन तो बने हैं, लेकिन उपचार की सुविधाएं यहां अत्यंत न्यून हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लोग जिला मुख्यालय पर उपचार के लिए आते हैं तो यहां भी उन्हें पर्याप्त दवाईयां उपलब्ध नहीं हो रही है।
हालात यह है कि जिला मुख्यालय पर महात्मा गांधी चिकित्सालय में सरकार की ओर से मुख्यमंत्री निशुल्क दवा वितरण योजना के तहत निर्धारित की गई दवाइयों में से 50 फीसदी से भी कम दवाइयां उपलब्ध हैं। ऐसे में जिला मुख्यालय पर आने वाले मरीजों का उपचार कैसे हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं अधिकांश मामलों में तो रैफर ही उपचार जैसी स्थिति है।
सिर्फ 290 प्रकार की दवाइयां
चिकित्सालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एसेंशियल ड्रग लिस्ट (ईडीएल) बना रखी है, जिसमें 591 प्रकार की दवाइयां शामिल हैं। इसके बावजूद जिला चिकित्सालय में मात्र 290 प्रकार की दवाइयां ही उपलब्ध हैं। ऐसे में कई बार मरीजों को बाजार से दवाइयां लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसमें भी कैंसर, किडनी फेल होने जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार की दवाइयां तो बाजार से ही लानी पड़ती है।
गंभीर रोग की जांच रामभरोसे
जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत तीन से अधिक प्रकार की जांच की सुविधा उपलब्ध हैं, लेकिन गंभीर रोगों की जांच रामभरोसे हैं। गंभीर बीमारी से पीडि़त रोगियों को निजी लेब से जांच करानी पड़ती है या उन्हें बड़े शहरों अहमदाबाद, बड़ोदरा, उदयपुर, इंदौर इत्यादि स्थानों पर जाना पड़ता है।
इनका कहना है
राज्य सरकार से दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं, उन्हें निशुल्क वितरित किया जा रहा है। दवाइयां कम होने पर ऑनलाइन डिमांड भेजते हैं। सप्ताह में दो से तीन बार जिला औषधि भंडार से दवाइयां ली जाती है। भंडार से दवाइयां नहीं मिलने पर अनुपलब्धता प्रमाण पत्र के आधार पर बाजार से दवाइयों के लिए किए टेंडर के आधार पर दवाइयों की व्यवस्था करते हैं।
महेश जोशी, प्रभारी निशुल्क दवा वितरण केंद्र,
महात्मा गांधी चिकित्सालय बांसवाड़ा
Published on:
15 Sept 2017 06:44 pm
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