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कांस्टेबल भर्ती 2018 : पहले ‘जल परीक्षा’, फिर ‘जांच परीक्षा’, फिर ‘कांस्टेबल परीक्षा’, फिर ‘बस परीक्षा’

पहले सत्र में उपस्थिति कम, दूसरे में रैला, सुबह 9 से शाम 6 तक इंटरनेट बंद, आज दूसरा चरण

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banswara

कांस्टेबल भर्ती 2018 : पहले ‘जल परीक्षा’, फिर ‘जांच परीक्षा’, फिर ‘कांस्टेबल परीक्षा’, फिर ‘बस परीक्षा’

बांसवाड़ा. कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के अन्तर्गत पहले दिन शनिवार को अभ्यर्थियों के साथ-साथ परीक्षा कराने वालों को मानो ‘अग्नि परीक्षा’ से गुजरना पड़ा। किसी अभ्यर्थी के कानों में पहनी बाली, लोंग, रिंग निकलवा दी गई तो हाथों में पहने कड़े भी। परीक्षा केंद्र में प्रवेश भी मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद दिया गया। सीट पर बैठने के बाद भी बायोमैट्रिक जांच की गई। वहीं परीक्षा के लिए तैनात अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और पुलिसकर्मियों में यह चिंता घर किए रही कि कहीं प्रश्नपत्र आउट जैसी स्थिति सामने न आ जाए। हालांकि इंटरनेट बंद किए जाने से ऐसे कोई स्थिति सामने नहीं आई।

जिले में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पहला चरण शनिवार को शांतिपूर्ण हुआ। जिले में 10 हजार परीक्षार्थी पंजीकृत थे। सुबह 10 बजे के इम्तिहान के लिए अभ्यर्थियों का दो घण्टे पूर्व ही केन्द्र पर पहुंचना प्रारंभ हो गया था। इस दौरान शहर में तेज बारिश ने भी अभ्यर्थियों का इम्तिहान लिया। कई अभ्यर्थी भीगते हुए परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचे। परीक्षार्थियों को इम्तिहान से पूर्व कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना पड़ा। हाइटेक उपकरणों से जांच के बाद केन्द्र में दाखिल हुए अभ्यर्थियों की सीट पर ही बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज की गई। इसके लिए केन्द्रों पर विशेष दल का गठन किया गया था। प्रश्न पत्र के स्तर को लेकर भी अभ्यर्थियों में खूब चर्चा रही। कोई खुश तो कोई मायूस दिखाई पड़ रहा था। बस नहीं मिलने तथा बारिश के चलतेे कुछ परीक्षा केन्द्रों पर अभ्यार्थियों का तय समय पर नहीं पहुंचने के कारण परीक्षा नियम के तहत प्रवेश नहीं दिया गया। इससे अभ्यार्थियों को निराशा हुई।

20 अतिरिक्त बसें लगाईं
हजारों अभ्यर्थियों के यहां पहुंचने से भीड़-भाड़ के हालात रहे। रोडवेज बसों से आवाजाही में भी अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आगार प्रबंधन रवि कुमार मेहरा ने बताया कि परीक्षा के मद्देनजर 20 अतिरिक्त बसें लगाई गईं। इसमें उदयपुर मार्ग पर 15 और गढ़ी-परतापुर के लिए 8 बसें शामिल हैं। बावजूद कई अभ्यर्थी बस की खिडक़ी से चढ़े तो कई ने छत पर चढकऱ यात्रा की। परीक्षार्थियों में रोडवेज के द्वारा निशुल्क यात्रा को लेकर अफवाह जोरों पर रही। इससे कई बार परीक्षार्थियों और रोडवेज परिचालकों के बीच तनातनी की भी स्थिति बनी। वस्तुस्थिति से अवगत कराने के लिए प्रबंधन की ओर से टिकट लेकर यात्रा करने की सूचना चस्पा की गई।

इंटरनेट रहा बंद
परीक्षा केन्द्र के आसपास पांच किलोमीटर में इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में इसे बहाल रखा गया। शहर में सुबह करीब 9 बजे से शाम को 5:45 तक इंटरनेट बंद रहा। इस दौरान बेसिक व ब्रॉण्डबैण्ड सेवाएं जारी रहीं।

बांसवाड़ा से जुड़े सवाल
प्रश्नपत्र में जिले से जुड़े कुछ सवाल भी आए। इनमें दो के सही उत्तर बांसवाड़ा रहे। इसमें सर्वाधिक इमारती लकड़ी सागवान का सर्वाधिक उत्पादन और दूसरा प्रश्न मैंगनीज की उपलब्धता से जुड़ा था। प्रथम सत्र में उपस्थिति कम रही। उत्तर प्रदेश व बिहार के अभ्यर्थी पंजीकृत थे, लेकिन तेज बारिश व दूरी के चलते उनके यहां नहीं आना बताया जा रहा है। इसके बाद दूसरे चरण में निकटवर्ती जिलों के अभ्यर्थी पंजीकृत होने से सभी केन्द्रों पर भीड़ रही। प्रथम सत्र में 10032 में से 3197 तथा द्वितीय सत्र में 8118 अभ्यर्थी उपस्थित हुए।

संस्थाप्रधान के नाम पत्र
परीक्षा देने आया एक अभ्यर्थी राउप्रावि डांगपाड़ा परिसर में सोया और उसने एक पत्र संस्थाप्रधान के नाम लिखकर कक्ष में डाल दिया। संस्थाप्रधान बृजमोहन द्विवेदी ने बताया कि सुबह विद्यालय पहुंचकर कक्ष खोला तो यह पत्र मिला। इसमें जयपुर मूल बिहार निवासी अभ्यर्थी प्रवीण कुमार ने लिखा था कि ‘हम आपको धन्यवाद कहना चाहते हैं कि हमने आपके प्रांगण में पूरी रात व्यतीत की। हमारी कोशिश रही कि आपके प्रांगण में किसी प्रकार का नुकसान नहीं करें। फिर भी इसमें प्रवेश किया, जिसके लिए माफी मांगते हैं। हम जयपुर से पुलिस की परीक्षा देने आए हैं और यहां की खूबसूरत यादों को लेकर जाएंगे। आपका विद्यालय बहुत खूबसूरत है। मैंने पूरी रात यहां अकेले व्यतीत की, जो मेरे जीवन की खूबसूरत यादों का एक हिस्सा रहेंगे। हमें अपना शिष्य ही समझना। धन्यवाद।’

पेश की सद्भाव की मिसाल
शहर के मुस्लिम समाज के वरिष्ठ नागरिकों ने सद्भाव की मिसाल पेश की। कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के तहत परीक्षार्थियों के ठहरने की व्यवस्था नहीं होने की जानकारी पर समुदायजनों ने व्यक्तिगत संपर्क कर अभ्यर्थियों के ठहरने की व्यवस्था की। यह व्यवस्था कालीकल्याध धाम मंदिर के पास हुसैनी चौक स्थित मोहम्मदी जमातखाने में की। यहां उनके खाने-पीने और बिस्तर की व्यवस्था भी की। इस दौरान पार्षद तुफैल एहमद सिंधी, हाजी नवाब खान सिलावट, सेवानिवृत्त उप निरीक्षक सईद खान, हाजी फय्याज मकरानी, अमजद खान, नाजीर मंसूरी आदि ने सहयोग किया।

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