
ऐसा है हमारे बांसवाड़ा का बस स्टैण्ड... कमाई दिन की 7 लाख रुपए, छत का उखड़ रहा प्लास्तर, सडक़ का नामोनिशान नहीं, बसों की हालत भी खस्ताहाल
बांसवाड़ा. सफर के आंगन में हिचकोलों का दर्द यात्रियों के लिए असहनीय हो रहा है। रूट की सडक़ों पर बने गहरे गड्ढों से जैसे-तैसे बच-बचाकर चालक बसों को यहां मुख्यालय स्थित रोडवेज बस स्टैण्ड पर लाते हैं तो यहां भी हिचकोलों से यात्रियों को राहत नहीं मिलती। बस स्टैण्ड परिसर की बदहाली रोडवेज के अधिकारियों से छिपी नहीं है, पर इसकी सुध नहीं ली जा रही है। इस ओर नींद कब खुलेगी, यही सवाल लोगों के जहन में है। बस स्टैण्ड से करीब सात दर्जन बसें यात्रियों को लेकर उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने को दौड़ लगाने के लिए प्रस्थान करती है, लेकिन उनकी शुरुआत ही हिचकोलों से होती है, जो गंतव्य तक खत्म नहीं होती।
समय पर नहीं हो रही मरम्मत
बस स्टैण्ड परिसर की समय पर मरम्मत नहीं हो रही है। इसके चलते जगह-जगह गहरे गड्ढे होने के साथ डामर उखड़ जाने से गिट्टियां निकल आई है। कई बार बसों के टायरों की चपेट से ये गिट्टियां उछलने से लोगों के जख्मी होने का अंदेशा भी बना रहता है।
भर जाता है पानी
बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाता है। जब बसें तेज गति से बस स्टैण्ड परिसर में प्रवेश करती है या प्रस्थान करती है तो गड्ढों में भरा गंदा पानी उछटने से यात्रियों के कपड़े गंदे होते रहते हैं।
भवन भी बदहाल
बस स्टैण्ड का भवन भी बदहाल है। नए बस स्टैण्ड पर बसों के संचालन की शुरुआत 1981 से हो रही है। इस दरम्यिान भवन व परिसर की मरम्मत एक-दो बार से ज्यादा नहीं हो सकी। परिसर में गड्ढे हैं तो भवन की छत से चूना झड़ रहा है। ऐसे में यह बदहाल नजर आ रहा है। गत वर्ष की बारिश से पहले छत पर प्लास्टिक बिछा कर पानी को टपकने से तो रोक दिया, लेकिन अंदर से छत व दीवारों की सुध नहीं ली गई। ऐसे में बस स्टैण्ड का सौन्दर्यकरण बिगड़ा हुआ है।
आठ लाख है प्रतिदिन की आमदनी
रोडवेज बस स्टैण्ड की आमदनी सात से आठ लाख रुपए है। यदि एक दिन की आमदनी की राशि को इस बस स्टैण्ड परिसर की मरम्मत के लिए लगा दिया जाए तो यह चमक जाए। साथ ही लोगों को हिचकोलों से राहत मिल जाए। बसों के कल-पुर्जे, पट्टे-कबाणी भी ढीले न हो।
इन मार्गों पर निर्धारित है बसों का शिड्यूल
रोडवेज बस स्टैण्ड से पांच मार्गों पर बसों के रूटचार्ट का शिड्यूल बना हुआ है। यहां 76 से 81 बसों का शिड्यूल है। जो बांसवाड़ा से उदयपुर, रतलाम, डूंगरपुर व कुशलगढ़ के लिए चक्कर लगाती है।
बारिश के बाद होगा काम
बस स्टैण्ड परिसर बदहाल है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखा गया है। फिलहाल बारिश का सीजन चल रहा है। यह सीजन खत्म होने के बाद मरम्मत आदि के काम कराए जाएंगे।
रविकुमार मेहरा, मुख्य प्रबंधक आगार, बांसवाड़ा।
Published on:
24 Aug 2018 04:09 pm
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