बांसवाड़ा. महात्मा गांधी अस्पताल में व्यवस्थाओं की पोल बुधवार को एक बार फिर खुली। जब संभाागीय आयुक्त नीरज के पवन निरीक्षण के लिए चिकित्सालय पहुंचे। जहां उन्होंने लंबे समय से चली आ रही सफाई व्यवस्था पर ही सख्त हिदायत दी। बुधवार सुबह चिकित्सालय पहुंचे संभागीय आयुक्त ने सुधार के लिए निर्देशित किया और सुधार न होने पर कार्रवाई की हिदायत भी दे डाली। संभागीय आयुक्त ने सबसे अधिक नाराजगी अस्पतल में गंदगी को लेकर व्यक्त की। इस पर अधिकारियों ने बचाव करते हुए दिन में दो बार सफाई होने की बात कही। लेकिन संभागीय आयुक्त संतुष्ट नहीं हुए और स्थायी समाधान के लिए सीढिय़ों की दीवारों और वार्ड की दीवारों पर भी टाइल्स लगाने की बात कही।
वहीं, दंत रोग विभाग में उपकरणों पर जंग लगी मिली। जिस पर उन्होंने तत्काल उपकरणों को बदलने की बात कही। उन्होंने डीडीसी दवा काउंटर, वार्ड, ट्रोमा वार्ड, ओपीडी, चिल्ड्रेन वार्ड आदि का निरीक्षण किया। इस मौके पर अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ दिनेश राय सापेला, एसडीएम प्रकाश चंद्र रेगर, सीएमएचओ डॉ एचएल ताबियार, पीएमओ डॉ खुशपाल सिंह सहित कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
मरीजों को रोजाना नहीं मिलती चादर, तकिया गायब
वार्ड में जांच में सामने आया कि मरीजों को रोजाना साफ चादर नहीं दी जाती। साथ ही तकिया का भी इंतजाम नहीं है। इस पर संभागीय आयुक्त ने रोजाना चादर बदलने और तकिया उपलब्ध कराने की बात कही।
चिकित्सक पहनेंगे आई कार्ड और एप्रिल
निरीक्षण में चिकित्सकों के द्वारा एप्रिल और परिचय पत्र न पहनने को लेकर भी उन्होंने हिदायत दी और रोजाना पहनने के लिए निर्देशित किया। इसके अतिरिक्त प्रथम मंजिल में लगी जालियों और वार्ड में बेड एवं अन्य सामान पर सफेद रंग करने के लिए भी निर्देशित किया। सात दिन बाद फिर आऊंगा, बिना बताए व्यवस्थाओं में सुधार के लिए निर्देशित करने के बाद संभागीय आयुक्त ने सात दिन बाद फिर ने निरीक्षण करने की बात कही। पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वो कभी भी बिना बताए आ सकते हैं। खामी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
पत्रिका उठा चुका है सफाई का मुद्दा
बताते चलें कि एमजी अस्पताल में सफाई व्यवस्था को लेकर लंबे समय से दिक्कत रही है। पूर्व में राजस्थान पत्रिका भी गंभीरता समझते हुए मामले को प्रमुखता से प्रकाशित कर चुका है। जिसके बाद कुछ दिन तो व्यवस्थाएं दुरुस्त रही पर उसके बाद गंदगी से मरीज और तीमारदार परेशान होना शुरू हो गए। अब देखने वाली बात यह है कि संभागीय आयुक्त के निर्देश के बाद सफाई व्यवस्था में अस्पताल प्रबंधन कोई ठोस कदम उठाएगा या परिणाम जस के तस ही रहेंगे।