
बांसवाड़ा. राज्य सरकार 12 फरवरी को अपने कार्यकाल का अंतिम बजट पेश करेगी। इस बजट से बांसवाड़ा के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। रेल का सपना अधूरा रहने से आमजन व्यथित है और वे चाहते हैं कि राज्य सरकार इसकी बाधाएं दूर कर अपनी भागीदारी ईमानदारी से निभाए और बजट में प्रावधान कर परियोजना के लिए राशि प्रदान करें। पेट्रोल-डीजल सस्ता और करों के सरलीकरण की भी अपेक्षा लोग संजोये हुए हैं। इस आदिवासी इलाके की स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं और कुपोषण के हालात को देखते हुए मेडिकल कॉलेज की स्थापना होनी चाहिए। पर्यटन को परवान देखने की आस भी लोग लगाए बैठे है और इसके लिए भी बजट में घोषणा के इच्छुक हैं।
बजट से पूर्व शनिवार को राजस्थान पत्रिका की ओर से अंकुर सीनियर सैकेण्डरी विद्यालय के सभागार में आयोजित परिचर्चा में विषय विशेषज्ञों से लेकर आमजन और छात्रों व युवाओं से उनकी राय जानी तो कुछ ऐसे सुझाव आए। परिचर्र्चा के दौरान उद्यमियों से लेकर बैंक कर्मियों एवं शिक्षक से लेकर छात्रों ने बेबाक राय रखी। पेश है परिचर्चा में आए सुझाव लोगों की जुबानी:-
शिक्षा के लिए पंचायतवार बजट आवंटित हो
शिक्षा को शैक्षिक एवं संसाधन की दृष्टि से सुदृढ़ करने के लिए सरकार को पंचायतवार बजट का आवंटन करना चाहिए। साथ ही इसका उपयोग करने के लिए विद्यालय स्तर पर बनी समितियों को भी अधिकार देने चाहिए जिससे सही मायनों में विद्यालय का भौतिक एवं शैक्षिक स्तर में सुधार हो सके।
अनन्त जोशी, प्रधानाध्यापक
रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे
जिले में रेल परियोजना को बंद कर दिया गया है, जबकि रेल सुविधा के आने से हजारों लोगों को रोजगार मिलता। श्रमिकों के लिए जिला स्तर पर श्रम भवन बनाया जाना चाहिए एवं श्रमिक कल्याण बोर्ड का पैसा सही मायनों में श्रमिकों के कल्याण पर खर्च होना चाहिए।
बलवंत वसिटा, जिला प्रभारी इंटक
पर्यटन विकास पर अधिक ध्यान आवश्यक
जिले में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं जिसके दोहन के लिए सरकार को अतिरिक्त बजट आवंटित करना चाहिए। पर्यटन से जहां रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, वहीं जिले का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर चमकेगा जिसका लाभ अन्य विकास योजनाओं को मूर्तरुप देने में मिलेगा।
रजनीकांत भट्ट, बैंककर्मी
निगम का निजीकरण रुके
विद्युत वितरण निगम के कई कार्यालय निजी हाथों में दिए जा रहे हैं जिसका नुकसान आम उपभोक्ता को उठाना पड़ रहा है। जीएसस का संचालन अप्रशिक्षित लोगों के हाथों में दिया गया है जिससे आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। इसको देखते हुए निगम में निजीकरण पर रोक लगनी चाहिए।
भगवतीलाल डिण्डोर, जिलाध्यक्ष राजस्थान विद्युत तकनीति कर्मचारी संघ
Published on:
10 Feb 2018 11:38 pm
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