
बांसवाड़ा/छोटी सरवा. जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र के मोहकमपुरा गांव के चावड़ा मोहल्ले में लोगों को उपचार देने के लिए चिकित्सा विभाग का दल सोमवार सुबह पहुंचा। 10 सदस्यीय दल ने घर-घर जाकर लोगों के सैंपल जुटाए और दवाइयां दी। गौरतलब है कि गांव के चावड़ा मोहल्ले के तकरीबन दो सौ लोग एक माह से बीमार चल रहे हैं। इसके बाद भी विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से इस मुद्दे को उठाया और 2 अप्रैल के अंक में ‘मोहकमपुरा गांव में 200 लोग बीमार, चिकित्सा विभाग को हवा तक नहीं’ शीर्षक से समाचार का प्रकाशन किया था।
जिसके बाद सोमवार सुबह कुशलगढ़ बीसीएमओ की अगुवाई में दल गांव पहुंचा और लोगों का उपचार प्रारंभ किया। तीन हिस्सों में बंटा दल जांच करने पहुंची 11 सदस्यी टीम से तीन हिस्सों में बंट कर मोहल्ले के 143 घरों में सर्वे किया। जहां कई मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए। इस दौरान लोगों में जोड़ों की समस्या अधिक पाई गई। साथ ही बुखार के मामले भी सामने आए। जिनका चिकित्सकों ने हाथों-हाथ उपचार किया। लोगों की जांच और ब्लड सैंपल के लिए चिकित्सा दल सुबह 10 बजे पहुंच गया और दोपहर 3 बजे तक मुस्तैद रहा।
उपचार देने पहुंचे बीसीएमओ पर बरसे ग्रामीण
छोटी सरवा. मोहकमपुरा गांव के चावड़ा मोहल्ले में लोगों का उपचार करने पहुंचे बीसीएमओ को लोगों के आक्रोश का शिकार होना पड़ा। क्षेत्र में आदर्श पीएचसी होने के बाद भी लोगों को समय पर उपचार न मिलना। उपचार के बाद अवैध वसूली करना, कार्मिकों का अस्पताल में उपस्थित न रहना सरीखे ढेरों आरोपों की झड़ी ग्रामीणों ने बीसीएमओ के सामने लगा दी। काफी देर तक नाराजगी जताने के बाद बीसीएमओ डॉ. राजेंद्र उज्जैनिया ने ग्रामीणों से समझाइश की और सेवाएं न देने वाले या अवैध वसूली करने वाले कार्मिकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही।
नाम का अस्पताल
ग्रामीणों ने बताया कि मोहकमपुरा का अस्पताल महज औपचारिकता भर रह गया है। डॉक्टर सहित स्टाफ नदारद रहता है। कोई भी बीमारी लेकर जाओ तो महज एक या दो टाइम की गोलियां दे दी जाती हैं। डॉक्टर की अनुपस्थिति में अस्पताल के बजाय कमरे पर बुला कर इलाज किया जाता है।
ले लिए पांच सौ रुपए
भोराज निवासी कचरू कटारा ने बताया कि लगभग 2 वर्ष पूर्व परिजन को डिलीवरी करवाने मोहकमपुरा ले गए थे। जहां डिलीवरी के बाद छुट्टी देने से पहले एक कार्मिक ने 500 रुपए की मांग की। और छुट्टी न देने की बात कही।
नहीं रहता कोई अस्पताल में
मोहकमपुरा निवासी रवि वाडेल ने बीसीएमओ का बताया कि अस्पताल में कोई नहीं रहता है। दवा के लिए कोई अस्पताल जाए तो दवा भी नसीब नहीं होती है।
मरहम-पट्टी के लिए जाते हैं 10-10 रुपए
दशरथ सिंह राठौर ने बताया कि अस्पताल में मरहम-पट्टी के नाम पर मरीजों से 10-10 रुपए लिए जाते हैं। एक बार नहीं बल्कि कई बार ऐसे मामले आए हैं। जब लोगों ने अवैध वसूली की गई है।
इनका कहना है...
मोहकमपुरा में कई ग्रामीणों ने अस्पताल में अव्यवस्थाओं को लेकर कहा। लेकिन किसी ने लिखित में शिकायत नहीं दी। ग्रामीणों से लिखित में शिकायत देने को कहा गया है। शिकायत न मिलने के बाद भी कार्मिकों को ग्रामीणों से उचित व्यवहार करने और शिकायत न आने के लिए पाबंद कर दिया है।
डॉ. राजेंद्र उज्जैनिया, बीसीएमओ, कुशलगढ़
Published on:
03 Apr 2018 11:16 am
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