
परतापुर. सात जन्म तक एकदूजे का साथ निभाने के वचनों के साथ 23 जोड़े रविवार को विवाह बंधन में बंधे। इसमें हजारों समाजजन साक्षी बने। मौका था मेवाड़ा कलाल समाज बांसवाड़ा के दसवें सामूहिक विवाह सम्मेलन का। गढ़ी हिम्मत मैदान पर आयोजित सम्मेलन में मनोहर महाराज के निर्देशन में मंत्रोच्चार के विवाह की रस्में हुई। मीडिया प्रभारी पोपट रैयाना ने बताया कि मुख्य यजमान राजा व जसवंत पुत्र अमृतलाल ने 31 हजार की बोली लगाकर पूजा सम्पन्न की। बिनौली का नेतृत्व कन्हैयालाल ने 15 हजार 101 रुपए की बोली लगाकर किया। सुबह आयोजन स्थल से सभी समारोह में वर-वधू पक्ष के रिश्तेदारों सहित समाजजन शामिल हुए।
गाजे बाजे से निकली बिनौली
बिनौली मुख्य मार्ग, गढ़ी कस्बे, बोरी रोड होकर पुन: विवाह स्थल गढ़ी खेल मैदान पहुंची। बिनौली के दौरान गढ़ी कस्बे में जैन समाज की ओर से पेयजल एवं जूस की व्यवस्था की गई। ड्रॉन से पुष्प वर्षा की गई। विवाह स्थल पर दुल्हों ने तोरण की रस्म अदा की। जिलाध्यक्ष हरीश कलाल एवं संयोजक मुकेश मोड़ सहित पदाधिकारियों व समाज प्रतिनिधियों ने तोरण द्वार पर दुल्हा-दूल्हन एवं परिजनों का स्वागत किया। इसके बाद पाण्डाल में फेरे आदि की रस्म अदा की गई। शाम को विदाई की घड़ी में परिजनों, रिश्तेदारों सहित उपस्थिति की आंखें भर आई। इस मौके पर संरक्षक देवचंद, मोहन रैयाना, पूनमचंद शेरगढ़, रमेश चौपासाग, लाभचंद बांसवाड़ा, उपाध्यक्ष मोहन आनंदपुरी, कमलेश गढ़ी, देवीलाल, राजेश आसन, सुंदरलाल डडूका, बाबूलाल आनंदपुरी, नरेश परतापुर, प्रदीप दौलतसिंह का गड़ा, ईश्वर सामागड़ा, नंदकिशोर खेड़ा, लोकेश सहित समस्त सेन्टर अध्यक्ष, सचिव एवं युवान मण्डल सदस्य उपस्थित थे।
एक पहल और बाल विवाह की कुप्रथा खत्म
बांसवाड़ा. बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करने और लोगों को इसके प्रति जागरुक करने की चंद लोगों की मुहिम रंग लाने लगी है और नजीर भी पेश कर रही है। सामूहिक विवाह की पहल ने अपने ही समाज में बाल विवाह की कुप्रथा में नकेल कस दी, वहीं अन्य को भी प्रेरित किया, ताकि लोग बाल विवाह में बच्चों का जीवन उलझने से रोक सकें और खुशहाल जीवन देने का मौका दें। बांसवाड़ा में मोड़ मेवाड़ा कलाल समाज की पहल रंग भी ला रही है।
सामूहिक विवाह किया अनिवार्य
जिलाध्यक्ष हरीश कलाल ने बताया कि समाज के लोगों के लिए सामूहिक विवाह में बेटा-बेटियों का विवाह करना अनिवार्य है। कोई एकल विवाह नहीं करा सकता। ऐसा निर्णय इसलिए किया ताकि कई खामियों को दूर किया जा सके और सबसे ज्यादा बाल विवाह पर। यह समाज के लिए एक कठोर निर्णय था, लेकिन समाजजनों ने मिलकर कदम बढ़ाया। लाभ यह मिला कि बाल विवाह पर नकेल लगी। समाज के सभी लोगों को सामूहिक विवाह कराना होता है और सामूहिक विवाह के दौरान बेटा-बेटी का जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। प्रमाण पत्र से बेटा-बेटी की उम्र पता लग जाती है। कोई कम उम्र का है तो समाज विवाह की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने बताया कि लोगों के सामने नजीर पेश करने और सामूहिक विवाह से जोडऩे के लिए सबसे पहले उन्होंने खुद के बेटे की शादी सामूहिक विवाह समारोह में कराई। समाज के पदाधिकारियों की सोच रंग लाई और आज पूर्ण समाज एकजुट है और पूर्ण रूप से बाल विवाह में नकेल कस चुकी है।
भामाशाहों ने दिए उपहार
कार्यक्रम में समाजजनों की उपस्थिति में बसंती प्रेमचंद व रंजना कांतिलाल ने चांदी के पायजेब, विमला मोहनलाल ने अलमारी, लक्ष्मी देवी पत्नी देवीलाल ने किचन सेट, शारदा जगदीश ने सूटकेस, कमला देवी पत्नी रामलाल, नेहा विनोद, रीया राजेन्द्र ने गैस चूल्हा व टंकी एवं भानु मणिलाल ने कम्बल सभी जोड़ों को भेंट किए। राजेन्द्र बोरी, हीरालाल एवं राजेश कलाल ने आर्थिक सहयोग दिया। ड्रॉन से पुष्प वर्षा के यजमान रमीला मोहनलाल मेतवाला थे। सूरजमल से नव विवाहित जोड़ों को रामचरित मानस भेंट की। इस मौके पर जिला समिति की ओर से भामाशाहों एवं उदयपुर संभाग कार्यकारिणी सदस्यों व मेवाड़ा आईका के पदाधिकारी का सम्मान किया गया।
Published on:
19 Feb 2018 01:03 pm
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