बांसवाड़ा. स्वतंत्रता सेनानी स्वतंत्रतानंद महाराज की ओर से स्थापित दयानंद आश्रम में रविवार को गुजरात के केशुभाई गोटी, काशीबा हरिभाई गोटी चेरिटेबल ट्रस्ट और केपू जेन्स केलवनी केयर के दयाल भाई वाधानी ने 50 लाख की लागत से बने छात्रावास का समारोहपूर्वक उद्घाटन किया।
इस अवसर पर दयाल भाई ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को मजबूत आधार देने के लिए ट्रस्ट देश में विभिन्न स्थानों पर छात्रावास निर्मित कर रहा हैं। इसका ध्येय विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार एवं राष्ट्र के प्रति सेवा के भाव जाग्रत करना है। कर्मयोगी परिवार निर्मल भावों से इनका निर्माण करवा रहा है। नई पीढ़ी को ज्ञान और संस्कार देंगे तो वह आने वाली पीढ़ी को उसी राह पर ले जाएगी और राष्ट्र सशक्त होगा। भारत माता मंदिर के महंत रामस्वरुप महाराज ने कहा कि जब अलग-अलग संस्थाएं अपने स्तर पर सेवा कार्य करती है तो समाज को सकारात्मक दिशा मिलती है। बड़ा रामद्वारा के संत रामप्रकाश एवं दयानंद आश्रम के जीववर्धन शास्त्री ज्ञान के साथ संस्कार के बीज भी अंकुरित कर रहे हैं। विधायक रमीला खड़िया ने कहा कि उनके पति स्व. हुरतिंग खड़िया भी इसी आश्रम से निकले और उनके जीवन व मुकाम पर यहां से प्राप्त ज्ञान और संस्कारों की अहम भूमिका रही।
सेवा भाव से मनुज सृजन
गुजरात के मानव सेवा चिकित्सालय के परेश भाई ने कहा कि मानव सेवा के भाव से इस छात्रावास से मानव सृजन होगा। दिल्ली से आए राजस्थान आर्य प्रतिनिधि सभा के नरेन्द्र नारंग ने कहा कि दान श्रेष्ठी कम मिलते हैं, लेकिन वे तप और साधना से समाज को बहुत कुछ देते हैं। आचार्य डॉ. सोमदेव शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद के सपनों को महात्मा हंसराज ने आगे बढ़ाया। उनके भाई मूलराज ने सहयोग किया। विवेकानंद केन्द्र की प्रांत संगठन पदाधिकारी शीतल जोशी ने कहा कि हमारी संस्कृति गौरवमयी रही है। हमें भी भावी पीढ़ी को यही मार्ग दिखाना होगा।
चार कमरों से आरंभ
स्वागत उद्बोधन में जीववर्धन शास्त्री ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी स्वतंत्रतानंद महाराज ने 1968 में चार कमरों से आश्रम की स्थापना की। तब यहां शैक्षिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को तराशा जाता था। जन प्रतिनिधियों व भामाशाहों के सहयोग यहां लगभग 75 विद्यार्थी छात्रावास में रहकर अध्ययन कर रहे हैं। क्षेत्र में धर्मान्तरण की समस्या से अवगत कराने पर कर्मयोगी परिवार ने 50 लाख की लागत से नया छात्रावास भवन तैयार कराया है। गुजरात से आए अन्य अतिथियों ने भी आश्रम के प्रयासों की प्रशंसा की। स्वागत अनंत गुप्ता, डॉ. महीपाल सिंह राव, डॉ. राकेश शास्त्री, रमेशचंद्र वडेरा, डॉ. युधिष्ठिर त्रिवेदी, प्रद्युम्न त्रिवेदी, राजेश भावसार आदि ने किया। संचालन शास्त्री दयानंद सागर ने किया। आभार जीतमल पणदा ने व्यक्त किया।