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वागड़ में जन्माष्टमी पर गोकुल बनाने की परम्परा, मिट्टी से बनाई जाती है भगवान कृष्ण की लीलाओं की मनमोहक झांकी

Krishna Janmashtami Tradition : बांसवाड़ा के वडनग़रा नागर समाज में गोकुल बनाने की परम्परा रही है

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वागड़ में जन्माष्टमी पर गोकुल बनाने की परम्परा, मिट्टी से बनाई जाती है भगवान कृष्ण की लीलाओं की मनमोहक झांकी

वागड़ में जन्माष्टमी पर गोकुल बनाने की परम्परा, मिट्टी से बनाई जाती है भगवान कृष्ण की लीलाओं की मनमोहक झांकी

बांसवाड़ा. देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। वागड़ में जन्माष्टमी पर वडनग़रा नागर समाज में गोकुल बनाने की परम्परा रही है। इस विशेष परम्परा के अनुसार जिस परिवार में किसी शिशु का जन्म होता है, वहां लकड़ी के बड़े पाटले पर मिट्टी को गूंथकर गोकुल जैसा स्वरूप दिया जाता था। बारिश के बाद दीवारों पर जमने वाली कांई को भी इस पर लगाया जाता है, ताकि हरियाली का वातावरण भी प्रदर्शित हो सके। पाटले के चारों ओर सजावट की जाती थी और घरों में बनाए मंदिर में बिराजे बालमुकुंद की प्रतिमा आदि को रखा जाता था।

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यह परम्परा आज भी समाज के कुछ घरों में निभाई जा रही है। पहले संसाधनों की कमी के कारण प्राकृतिक वनस्पतियों, घास, दूब आदि से सजावट की जाती थी, लेकिन अब सजावट की सामग्री की बहुलता है। ऐसे में आकर्षक झांकियां सजाई जा रही हैं। शुक्रवार को लाभकाली मंदिर में अलख भाई की ओर से झांकी सजाई गई, जिसमें कृष्ण जन्मस्थान, कंस की जेल, वासुदेव द्वारा यमुना को पार करने, निधि वन, कालियामर्दन, केशी वध, पूतना वध, अघासुर वध आदि को प्रदर्शित किया गया। वहीं दीनानाथ नागर की ओर से झांकी सजाई गई।

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धूमधाम से मनाई जन्माष्टमी
इधर, वडनग़रा नागर समाज की ओर से जन्माष्टमी हर्षोल्लास से मनाई गई। समाज सचिव डा. आशीष दवे ने बताया कि स्मार्त परम्परा के तहत भगवान कृष्ण के आगमन की प्रतीक्षा में एक दिन पहले जन्माष्टमी मनाई जाती है। इसी के तहत शुक्रवार को गोवद्र्धननाथ मंदिर में भगवान के श्रीविग्रह का मनोहारी शृंगार कर श्री गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ व षोडशोपचार पूजन किया गया। समाजजनों ने घरों में झांकियां सजाई। रूदे्रश्वर स्थित राधाकृष्ण मंदिर में भी विशेष पूजा व महाआरती की गई।