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वागड़ का यह गांव बन गया ‘दूध वाला गांव’, हजारों लीटर दूध का उत्पादन बना 350 घरों के लिए रोजगार का साधन

दुग्ध व्यवसाय और पशुपालन से समाज का आर्थिक स्तर ऊंचा उठा है

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banswara

वागड़ का यह गांव बन गया ‘दूध वाला गांव’, हजारों लीटर दूध का उत्पादन बना 350 घरों के लिए रोजगार का साधन

बांसवाड़ा. पशुपालन की दृष्टि से समृद्ध बांसवाड़ा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी अग्रणी है। जहां एक ओर दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड दूध को तरस रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर से सटा गांव निचला घंटाला ‘दूध वाला गांव’ बन गया है। निचला घंटाला गांव में करीब 350 घर गुर्जर समाज के हैं और सभी परिवार दुग्ध व्यवसाय से जुड़े हैं। इस गांव की भोर पशु सेवा और दूध से ही होती है। तडक़े से ही महिलाएं अपनी गाय-भैंसों को चारा-पानी देने के साथ दूध निकालने में जुट जाती हैं। दूध निकलने के बाद पुरुष वर्ग संग्रहण केंद्र और शहर में दुग्धापूर्ति के लिए रवाना हो जाते हैं।

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गांव के मणिलाल गुर्जर बताते हैं कि शहर में निजी आवासों में दूध की आपूर्ति दोपहर तक हो पाती है। इसके बाद घर और खेती का काम देखने के बाद शाम को फिर दूध की आपूर्ति को निकल जाते है। उन्होंने कहा कि करीब पांच हजार लीटर दूध गांव में होता है। इसमें अधिकांश शहर में और समाज के लोगों की ओर से संचालित डेयरी के माध्यम से विक्रय होता है। उनका कहना है कि दुग्ध व्यवसाय और पशुपालन से समाज का आर्थिक स्तर ऊंचा उठा है और समाज का युवा वर्ग भी इसे अपनाने लगा है, जो भविष्य के लिए सुखद संकेत है।