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World Tourism Day : हरियाली, पुरा सम्पदा सहेजें-संवारें तो पर्यटक आए हमारा बांसवाड़ा निहारने

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बांसवाड़ा

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Varun Kumar Bhatt

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Updated: 27 Sep 2018, 2:50 PM IST

banswara

World Tourism Day : हरियाली, पुरा सम्पदा सहेजें-संवारें तो पर्यटक आए हमारा बांसवाड़ा निहारने

बांसवाड़ा. लोढ़ी काशी, 100 टापूओं का शहर सहित कई उपनामों से ख्याता वागड़ की धरा पर सैलानियों के लिए क्या नहीं है। अप्रतीम प्राकृतिक सौंदर्य है, यह भी ऐसा कि हर किसी को लगता है स्वर्ग है तो यहीें है। आदिवासी संस्कृति की विशेष छटा है, नदी-नाले हैं, कल कल करते झरने हैं, विशाल बांध है, प्रवासी परिंदें हैं, सघन वन और वन्य जीव हैं, मां त्रिपुरा जैसा आस्था का केन्द्र है, अरथूना के मंदिरों के रूप में प्राचीन धरोहर है, शहादत स्थली मानगढ़ धाम है, फिर भी यहां एक पर्यटक नहीं आता तो इसके पीछे कहीं न कहीं प्रशासनिक व्यवस्था की कमी ही जिम्मेदार है। लगभग 165 किमी दूर सैलानियों के स्वर्ग उदयपुर के सामीप्य के बावजूद वहां से हम पर्यटकों को खींच नहीं पा रहे हैं। ऐसे में इस सुंदर जनजाति जिले को जो स्थान मिलना चाहिए था, वो अब तक नही मिल पाया है।

सब कुछ होते हुए भी यदि सैलानियों का अकाल है तो इसके पीछे आधारभूत सुविधाओं के प्रति प्रशासनिक अदूरदर्शिता ही झलकती है। इक् कीसवीं सदी के इस दौर में सडक़, सफाई, परिवहन सेवाओं, ठहरने और अच्छे खानपान की सुविधाओं का अभाव वागड़ की विशेषताओं को देश और दुनिया के लोगों तक पहुंचाने में बाधक बने हुए हैं। न या ढांचा विकसित हो पा रहा है और न मौजूदा ढांचे की ठीक से सार संभाल हो पा रही है। फिर कैसे आएंगे पर्यटक। यह बात दीगर है कि माही बैक वाटर के 100 टापूओं को विकसित करने के लिए सरकार ने पहली बार बजट में घोषणा की ओर अब इस दिशा में कदम बढऩे लगे है, लेकिन पर्यटन स्थलों के विकास के लिए जिस गति से काम होना चाहिए था, उसकी अब भी दरकार हैं।

ड्रीम गर्ल को भी पसंद आया बांसवाड़ा
बांसवाड़ा की प्राकृतिक सुंदरता की प्रशंसा अभिनेत्री हेमा मालिनी भी कर चुकी हैं। फिल्म शूटिंग के लिए भी जिले को मुफीद बताया था। यहां कई युवाओं ने शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग भी की है। साथ ही हरियाली से आच्छादित पहाडिय़ों पर वीडियो एलबम भी शूट हुए हैंं। मुख्य रूप से बरसात के दिनों में गांव-ढाणियों में दूर-दूर तक फैली हरियाली की चादर लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। इसके अलावा झरने भी मनमोहक नजारा बिखेरते है। इन तमाम हालातों में प्रकृति के इस वरदान को सहेजने की जरूरत है।

ये हमारे प्रमुख स्थल, कुछ बेहतर हो तो बने बात
आदिवासियों की शहादत स्थली मानगढ़ धाम
माहीडेम, गेमन पुल, सुरवानिया बांध, कल्प वृक्ष , कागदी पिकअप
बेणेश्वर, अरथूना, त्रिपुरा सुंदरी, घोटिया आंबा, साईं मंदिर, पाराहेड़ा, मंदारेश्वर, समाई माता
रामकुण्ड, भीमकुण्ड,
रतलाम मार्ग पर प्राकृतिक झरना जुआफाल , कडेलिया
प्राकृतिक झरना आबापुरा मार्ग पर सिंगपुरा
चार झरनों की छटा रनीबनी गणाऊ में
चाचाकोटा, काकनसेजा

पर्यटन दिवस पर चाचाकोटा का कुछ ऐसा नजारा दिखाई पड़ा
चहुंओर सागर की तरह पानी, वादियों की हरियाली, शुद्ध ताजी आबोहवा, सुकून और शांत वातावरण। एक पर्यटक को इससे ज्यादा और क्या चाहिए। वागड़ की धरा पर उदयपुर संभाग के सबसे बड़े माही बांध के किनारे और उसके बीच के टापुओं का परिदृश्य कुछ ऐसा ही है। बांध में ऐसे करीब एक सौ टापू हैं जो बोल तो नहीं सकते, लेकिन सैलानी मन को भाने वाला वातावरण प्रदान कर शायद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को पैगाम दे रहे हैं। वे प्रयास करें कि पर्यटक आएं, आबोहवा का लुत्फ उठाएं, सुनहरी यादों को दिलोदिमाग में संजोये। फोटो: दिनेश तंबोली

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