
बदलते परिवेश में पिछड़ गया मारवाड़-गोडवाड़ का पर्यटन विकास
सादड़ी/पाली। अरावली पर्वतमाला तलहटी स्थित प्रस्तर स्थापत्य कला की नायाब कृति राणकपुर जैन तीर्थ मन्दिर व भयारण्य वन क्षेत्र में पर्यटन की अपूर्व स भावनाओं के बावजूद यहां विकास कोसों दूर है। सरकारें बदलने के साथ वादे भी धूमिल हो जाते है। क्षेत्र की स्थिति वही रहती है। पर्यटन को बढावा देने वाले महत्वाकांक्षी प्रस्ताव जिन्हें जिला कलक्टर से बनाकर भेजे वे सभी योजनाएं मूर्त रूप लेने से पहले ही कागजों में खोकर रह गईं। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने अपने कार्यकाल में बजट में यहां दो मर्तबा 50-50 लाख रुपए का बजट स्वीकृति का प्रावधान रखा। इससे यहां पर्यटन हब की दृष्टि से ऑडिटोरियम निर्माण, हाट एवं क्राफ्ट बाजार निर्माण का स्वप्न दिखाया, जो आज तक मूर्तरूप नहीं ले पाया। सैलानियों की आवाजाही बढ़ाने की दृष्टि से यहां नौकायन व अरण्य वन क्षेत्र में प्राकृतिक नेचर वनपथ निर्माण करवाकर अरण्य सफारी को बढ़ावा देना तय किया लेकिन सरकार बदलने के साथ ही योजनाएं दम तोड़ गई।
प्रतिवर्ष आते हैं डेढ़ लाख विदेशी सैलानी
प्रकृति व पर्यावरण से ओतप्रोत हरीतिमा से आच्छादित सुरम्य पर्वतमालाओं, कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों की अठखेलियां, विश्व विख्यात राणकपुर जैन मन्दिर व परशुराम महादेव तीर्थ पर प्रतिवर्ष डेढ़ लाख से अधिक विदेशी सैलानी एवं 12-15 लाख देशी सैलानी पहुंचते हैं। यहा वर्ष पर्यन्त विदेशी सैलानी की आवाजाही रहती है। पर्यटन दृष्टि से विकास की अपूर्व सम्भावनाएं विद्यमान हैं। तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. पृथ्वीराज ने पर्यटन हब विकास की दृष्टि से ऑडीटोरियम निर्माण, हाट व क्राफ्ट बाजार निर्माण का स्वप्न दिखाया। जो उनके स्थानान्तरण संग कागजों में खोकर रह गया।
खो गया गोडवाड़ महोत्सव
पूर्व जिला कलक्टर ने खेतलाजी मेला को विश्व पटल तक पहुंचाने की कवायद में गोडवाड़ महोत्सव शुरू किया, जो बजट के अभाव में राणकपुर महोत्सव तक ही सिमट गया। पूर्ववर्ती सरकार ने दो बार बजट में 50-50 लाख रुपए का प्रावधान रखा लेकिन पुख्ता मॉनिटरिंग के अभाव में बजट अनुरूप काम नहीं हो पाया। राणकपुर-सादड़ी बांध पर इस बार पर्यटन विकास दृष्टि से बजट प्रावधान अनुरूप योजना बनाई गई जिसको लेकर पिछले दिनों केन्द्रीय दल ने मौका मुआयना भी किया। नलवाणिया बांध में लेक गार्डन विकास हो सकता है।
पर्यटन विकास की है सम्भावनाएं
पर्यटन विकास की असीम सम्भावनाओं के बावजूद आज तक रणकपुर में पर्याप्त विकास नहीं हो पाया। कांग्रेस सरकार ने बजट में 50-50 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की। इस सरकार में पर्यटन विभाग और प्रशासन को सरकार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अरण्य वनपथ का विकास नहीं हो पाया। -दिनेश मीणा, पालिकाध्यक्ष, सादड़ी
Published on:
27 Sept 2018 12:35 pm
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