
गांव में शव पहुंचने के बाद गमजदा परिजन। फोटो- पत्रिका
पाली। 'थूं ओ काईं किदौ, म्हानै छोड़नै गियो रे… थारा लारे तो देखतो, मां-बाप माथै काईं गुजरी रे… बुढ़ापो में कुण म्हनै हियारो देसी…' यह कहते हुए जेल में आत्महत्या करने वाले राजेन्द्र उर्फ राजू के माता-पिता के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जैसे ही परिजनों ने राजू का शव देखा, चीख-पुकार मच गई। परिजन ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बेटे के गम में माता-पिता बार-बार बिलख उठते और रोने लगते।
पिता भंवरूराम, मां सोहनी देवी, भाई सोहनलाल व किशन, बहन नौरती, शारदा व शोभा देवी, भाभी माया देवी व संगीता, काका चैनाराम, बुआ चुन्नी देवी व काकी गट्टू देवी शव देखते ही अपने होश खो बैठे और बार-बार शव से लिपटकर राजू को पुकारते रहे। इससे पहले मृतक राजू के भाई, काका और फुफा पाली पहुंचे और शव को लेकर बांझाकुड़ी ले गए, जहां उसे दफनाया गया।
जैतारण थाने में एक नाबालिग को भगाकर ले जाने व बलात्कार के मामले में जोधपुर जिले के बोरूंदा निवासी राजू उर्फ राजेन्द्र को 26 दिसम्बर को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था। उसे पाली जेल में निरुद्ध किया गया, जहां 9 जनवरी को उसने बाथरूम में नल के पाइप से तौलिए की रस्सी बनाकर फंदा लगा लिया। इसके बाद पुलिस टीम उसके परिजनों को लेने गांव गई। वहां से परिजन 10 जनवरी की दोपहर पाली पहुंचे और उनकी मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम किया गया।
परिजनों का कहना है कि राजू दोषी नहीं था। उनके अनुसार लड़की स्वयं उसके साथ गई थी और पुलिस ने उसे बुलाकर फंसा दिया। खेतों में रखवाली और कोयले आदि का काम कर गुजारा करने वाले इस परिवार में राजू ही सहारा था। उसके एक भाई का हाथ भी खराब है।
राजू परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके जाने से परिवार टूट गया है। उसके भाई ने कहा कि अब हमारी एक ही मांग है, राजू को जेल भेजने और उसे फंसाने वालों को सजा मिले। परिवार की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस के पैसे भी उनके पास नहीं थे, जो पुलिसकर्मियों ने उपलब्ध कराए।
Published on:
12 Jan 2026 03:01 pm
बड़ी खबरें
View Allपाली
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
