
चेंडा गांव निवासी ट्रेवलर से हिंदी में बात करती जिंका शहर की निवासी (फोटो- पत्रिका)
World Hindi Day: पाली: हिंदी अब सिर्फ भारत की भाषा नहीं रही, बल्कि विश्व के अनेक देशों में पहचान और अपनत्व की भाषा बनती जा रही है। अफ्रीका से लेकर यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक जहां भी भारतीय पहुंचे हैं, वहां हिंदी अपनी खुशबू छोड़ रही है।
विदेशी गलियों में किसी भारतीय को देखते ही जब ‘नमस्ते, आप कहां से हैं’ सुनाई देता है, तो यह एहसास और गहरा हो जाता है कि हिंदी ने सचमुच सरहदें तोड़ दी हैं। अफ्रीकी देश इथोपिया के जिंका शहर में ऐसा ही एक अनुभव पाली जिले के चेंडा गांव निवासी ट्रैवल ब्लॉगर शैतानराम देवासी को हुआ।
बाजार में प्रवेश करते ही एक स्थानीय महिला ने उन्हें रोककर हिंदी में अभिवादन किया ‘नमस्ते, कहां से हैं आप?’ देवासी बताते हैं कि जब उन्होंने महिला से हिंदी सीखने का माध्यम पूछा, तो जवाब मिला, हिंदी फिल्में।
यही नहीं, उसने आरती ‘ओम जय जगदीश हरे…’ के बोल भी सुना दिए। यह पल उनके लिए अविस्मरणीय बन गया। देवासी के अनुसार तंजानिया, युगांडा, केनिया और रवांडा जैसे देशों में हिंदी बोली और समझी जाती है।
इंग्लैंड में प्रवासी राजस्थानियों की ओर से आयोजित ‘जीमण’ कार्यक्रम हिंदी और राजस्थानी संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। लंदन और ब्रिटेन में बसे राजस्थानी समुदाय की ओर से दाल-बाटी, चूरमा, सांगरी जैसे पारंपरिक व्यंजनों और लोक संगीत के साथ संस्कृति का उत्सव मनाया जाता है।
राजस्थान एसोसिएशन यूके की ओर से इस आयोजन की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। राजस्थानी आतिथ्य और हिंदी संवाद के माध्यम से यह कार्यक्रम विदेशों में हिंदी की पहचान को मजबूत कर रहा है।
मालदीव में रहने वाले पाली के माधव और सुरभि मूंदड़ा बताते हैं कि वहां होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिंदी का ही प्रयोग किया जाता है। स्थानीय लोग भी धीरे-धीरे हिंदी सीख रहे हैं। ‘नमस्ते, कैसे हो क्या कर रहे हो’ जैसे वाक्य आम हो गए हैं।
हर वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हिंदी भाषा के वैश्विक स्वरूप को सशक्त करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रयोग को बढ़ावा देना है। यह राष्ट्रीय हिंदी दिवस (14 सितंबर) से अलग होता है, जो भारत में हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाने की स्मृति में मनाया जाता है।
दरअसल, 10 जनवरी 1975 को महाराष्ट्र के नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस ऐतिहासिक सम्मेलन का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। इसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और हिंदी को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई। इसी कारण 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में चुना गया।
विश्व हिंदी दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इसके प्रचार-प्रसार को गति देना और हिंदी को एक अंतरराष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में मजबूत करना है। यह दिन प्रवासी भारतीयों और विदेशी नागरिकों को हिंदी से जोड़ने का माध्यम भी बनता है।
विश्व हिंदी दिवस को आधिकारिक रूप से मनाने की शुरुआत साल 2006 में हुई। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसके बाद से विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी इसे उत्साहपूर्वक मनाया जाने लगा।
साल 2026 में विश्व हिंदी दिवस की थीम है- ‘हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’। इसका उद्देश्य हिंदी को केवल साहित्यिक भाषा ही नहीं, बल्कि तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म, कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी सशक्त बनाना है। साथ ही भारत सरकार हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की सातवीं आधिकारिक भाषा बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
Published on:
10 Jan 2026 05:09 am
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