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Unique Wedding Rituals : राजस्थान में अनोखी रस्म, थप्पड़ मारकर तय होती है शादी

Unique Wedding Rituals : बांसवाड़ा रिश्तेदार एवं समाजजन के बीच मंगलगीतों की स्वर लहरियां और हल्दी लगे हाथ से थप्पड़ मारना। इसके साथ ही तय हो जाती है मंगनी।

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Unique Wedding Rituals : बांसवाड़ा रिश्तेदार एवं समाजजन के बीच मंगलगीतों की स्वर लहरियां और हल्दी लगे हाथ से थप्पड़ मारना। इसके साथ ही तय हो जाती है मंगनी। जी हां पढ़ने, सुनने एवं देखने में भले अजीब लगे, लेकिन कुछ ऐसा ही होता है लबाना समाज में विवाह से पहले निभाई जाने वाली मंगनी-सगाई की रस्म में। समाज में इस तरह की अनूठी रीत का निर्वहन कर प्रीत जोड़ी जाती है। इस रीत के कई मायने भी हैं। जिस पर आज भी समाजजन चलते हैं।

परंपरा के निर्वहन की खास बात यह है कि समाज में विवाह विच्छेद, तलाक जैसा एक भी मामला अब तक सामने नहीं आया है। सामाजिक स्तर पर इस पर पूरी तरह पाबंदी है। कभी विवाद हो भी जाता है तो इसे समाज स्तर पर सुलझाया जाता है। रिश्तों में मिठास हमेशा बनी रहती है।

सगाई से पहले दी जाती है समाज को जानकारी

इस परंपरा को बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर, डूंगरपुर के मांडवी चोखले में देखा जा सकता है। दो पक्षों में पहले बातचीत चलती है। जब सगाई करना तय हो जाता है तो लड़के पक्ष से 4-6 लोग लड़की के घर पहुंचते हैं। जहां लड़की पक्ष समाज के मुखिया को बुलावा भेजता है। उनके पहुंचने पर समाजजन को बुलाने की अनुमति दी जाती है। समाजजन की मौजूदगी में दोनों पक्षों के रिश्ते की जानकारी दी जाती है। उसके बाद सगाई की तिथि तय की जाती है।

समाज के बीच ऐसे निभाते हैं रस्म

सगाई की तय तिथि पर समाजजन मौजूद होते है। मुखिया की अनुमति के बाद यहां लड़के पक्ष के किन्ही दो युवकों को बिठाया जाता है। इसमें जिस युवक की सगाई होनी होती है, वह नहीं होता है। लड़के पक्ष की ओर से एक-एक रुपए के पांच सिक्के एवं लड़की पक्ष की ओर से हल्दी व पांच सुपारी लेकर महिला पहुंचती है। सिक्के-सुपारी का दोनों पक्षों में आदान-प्रदान होता है। उसके बाद से मुखिया हल्दी लगे हाथों से युवक को थप्पड़ मारकर सगाई पक्की होने की मुहर लगाते है। साथ ही मुंह मीठा कराया जाता है। प्रतापगढ़ के मांड़वी निवासी चटकू भाई कहते हैं, पूर्व के सालों में थप्पड़ मारने की रस्म का निर्वहन महिला निभाती थी। बाद के सालों में यह परंपरा लड़की पक्ष के गांव के समाज के मुखिया की ओर से निभाई जा रही है। इस परंपरा के कई मायने हैं।


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